सिस्टम से लड़ते-लड़ते सोमारी देवी बृहस्पतिवार को जिंदगी की जंग हार गईं और उनके पति रामअवध अस्पताल पहुंच गए। दंपती ने दो साल पहले प्रधानमंत्री आवास के लिए आवेदन किया था। आवास की स्वीकृति के चंद दिनों बाद ही सोमारी देवी की मौत हो गई। अभी तक आवास निर्माण का पैसा खाते में नहीं पहुंचा है।
रामअवध बताते हैं कि बड़ा बेटा महेंद्र पुणे में तो छोटा बेटा संतोष गोवा में रहता है। पति-पत्नी गांव में रहते हैं। दृष्टि बाधित होने की वजह से रामअवध पत्नी सोमारी के पास ही रहते थे। रात में सोने के लिए सोमारी देवी पशुओं के लिए बनाई गई झोपड़ी में चली जाती थीं। बृहस्पतिवार रात में ठंड से बचने के लिए झोपड़ी अलाव जलाकर रख दिया था।
यही उनकी मौत का कारण बन गया। रामअवध कहते हैं कि सोमारी को मक्का मकान बनने का इंतजार था। अब वह अपना घर नहीं देख पाएंगी। बताते हैं कि कई बार पैरवी करने के बावजूद उनका नाम आवास के लिए स्वीकृत हो पाया है। अभी तक मकान का पैसा खाते में नहीं आया है।