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फिराक गोरखपुरी का घर खंडहर में हो रहा है तब्दील, जिम्मेदारों के प्रति ग्रामीणों में आक्रोश

Fri, 07 Aug 2020 03:55 PM IST
vivek shukla ब्रजेन्द्र सिंह, कुईं बाजार (गोरखपुर)।

सार

  • स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रघुपति सहाय उर्फ फिराक गोरखपुरी के पैतृक घर का बड़ा हिस्सा छह दिन पहले बारिश में ढह गया
  • गोरखपुर जिले के बनवारपार गांव में है फिराक गोरखपुरी का पुश्तैनी खपरैल का मकान
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फिराक गोरखपुरी का पुश्तैनी खपरैल का मकान। (इनसेट में फिराक गोरखपुरी की फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
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एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमें, और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं... इसी खंडहर में कहीं कुछ दीए हैं टूटे हुए, इन्हीं से काम चलाओ बड़ी उदास है रात... मशहूर शायर व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रघुपति सहाय उर्फ फिराक गोरखपुरी की लिखी ये पंक्तियां उनके ही पैतृक आवास पर इस समय सटीक बैठ रही हैं। अदब की दुनिया के बेहतरीन फनकार फिराक की जन्मस्थली की उपेक्षा से गांव के लोग और साहित्यकार बेहद आहत हैं।

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गोरखपुर जनपद का नाम देश-दुनिया में रोशन करने वाले अजीम शायर फिराक गोरखपुरी का पैतृक आवास आहिस्ता-आहिस्ता खंडहर में तब्दील हो रहा है। गोला क्षेत्र के बनवारपार में स्थित फिराक साहब के पुश्तैनी खपरैल के मकान का कुछ हिस्सा पिछले शनिवार को बारिश में ढह गया, लेकिन अभी तक कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या जनप्रतिनिधि इधर झांकने तक नहीं आया।

इस बात को लेकर बनवारपार के लोगों के साथ ही साहित्य और शायरी में रुचि रखने वालों में खासा आक्रोश है। इनका कहना है कि फिराक साहब की धरोहर को संरक्षित नहीं कर पाना जनप्रतिनिधियों और अफसरों की घोर लापरवाही है।

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