गोरखपुर। स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ी पहल करते हुए एम्स में अब गर्भ में पल रहे भ्रूण को भी खून चढ़ाने की सुविधा शुरू की जा रही है। फिटल ब्लड ट्रांसफ्यूजन की इस अत्याधुनिक प्रक्रिया के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इसके शुरू होने से पूर्वांचल, बिहार और नेपाल के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
फिलहाल प्रदेश में यह सुविधा केवल पीजीआई, लखनऊ और बीएचयू जैसे चुनिंदा सरकारी संस्थानों में ही उपलब्ध है। ऐसे में एम्स गोरखपुर में इसकी शुरुआत क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती देगी। ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के फैकल्टी इंचार्ज डॉ. सौरभ मूर्ति ने बताया कि यह प्रक्रिया उन मामलों में बेहद महत्वपूर्ण होती है, जहां माता और पिता के रक्त समूह में आरएच फैक्टर को लेकर असंगति होती है। खासतौर पर तब, जब मां का ब्लड ग्रुप आरएच निगेटिव और पिता का आरएच पॉजिटिव होता है। ऐसी स्थिति में गर्भस्थ शिशु के आरएच पॉजिटिव होने की आशंका अधिक रहती है। इससे भ्रूण के शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी यानी एनीमिया विकसित हो सकता है।
उन्होंने बताया कि इस स्थिति में मां के शरीर में बनने वाली एंटीबॉडी भ्रूण की लाल रक्त कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे भ्रूण की जान को गंभीर खतरा हो सकता है। यदि समय रहते इसका उपचार न किया जाए तो गर्भ में ही शिशु की मृत्यु तक हो सकती है। ऐसे जटिल मामलों में फिटल ब्लड ट्रांसफ्यूजन एक प्रभावी विकल्प होता है। इस प्रक्रिया के तहत अल्ट्रासाउंड की मदद से गर्भ में मौजूद भ्रूण को सीधे खून चढ़ाया जाता है, जिससे उसके शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य किया जा सके।
बोलीं कार्यकारी निदेशकइस संबंध में एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने कहा कि इस सुविधा के शुरू होने से न केवल शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी बल्कि गर्भवती महिलाओं को भी समय पर और बेहतर उपचार मिल सकेगा। साथ ही, दूर-दराज के मरीजों को अब इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। यह पहल क्षेत्र में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।