गोरखपुर में कृषि विभाग के अफसर भले ही यूरिया की विक्री में किसी बड़ी गड़बड़ी से इनकार कर रहे हों मगर पड़ताल में जो तथ्य सामने ओ रहे हैं वे चौंकाने वाले हैं। शासन के निर्देश पर विभाग खाद खरीदने वाले 20 बड़े किसानों का सत्यापन कर रहा है।
साथ ही उन 18 विक्रेताओं की भी जांच हो रही है, जिन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष में 23 कुंतल यूरिया बिना आधार के बेच दिया। ज्यादातर गड़बड़ी बेलघाट ब्लाक से सामने आ रही है। 20 बड़े खरीददारों में से 11 इसी ब्लाक के हैं।
ब्लाक के एक सहकारी समिति के सचिव प्रेमपाल ने खुद नौ टन यूरिया के साथ ही एक अन्य किसान विकास यादव को भी नौ टन यूरिया बेच दी, जबकि दोनों की खेती उतनी नहीं कि उन्हें इतनी बड़ी मात्रा में यूरिया की जरूरत हो। इसकी पुष्टि शासन की तरफ से भेजे गए नोडल अफसर ने भी की है।
इसी ब्लाक के एक सचिव कृष्ण मणि शुक्ला ने अपने ही परिवार के इंदू शुक्ला, आशीष आदि के नाम 60 टन से अधिक यूरिया बेच दी, जबकि इनके पास जितनी खेती है उसका काम 15 से 20 बोरे में हो जाता। वहीं गोला के खाद विक्रेता ने अपनी ही पत्नी के नाम नौ टन यूरिया बेच दी।