गोरखनाथ मंदिर में चढ़ाए जाने वाले फूल से खाद बनाया जा रहा है।
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गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर पर चढ़ाए गए फूलों से खाद बनाने की शुरुआत हो चुकी है। मंदिर से रोजाना करीब 20 किलो फूल चढ़ावा के रूप में मिल रहा है।
नगर निगम की टीम इन फूलों को इकट्ठा कर नेताजी सुभाष चंद्र बोस नगर में बनाए गए मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) में लाती है, जहां खाद बनाई जा रही है। जल्द ही शहर के अन्य मंदिरों से चढ़ाए गए फूलों को इकट्ठा करना शुरू किया जाएगा।
अमर उजाला फाउंडेशन और नगर निगम की अनूठी पहल के तहत शहर को साफ सुथरा और स्वच्छ बनाया जा रहा है। इसके तहत शहर की विभिन्न कॉलोनियों और अपार्टमेंट में लोगों को जागरूक कर गीले और सूखे कूड़े को स्रोत स्थल पर ही अलग-अलग कर लिया जा रहा है। इसके बाद गीले कूड़े से खाद बनाई जा रही है। इसी क्रम में फूलों से भी खाद बनाने की शुरुआत हो चुकी है।
नगर निगम खरीदेगा प्लास्टिक कटिंग मशीन
सहायक नगर आयुक्त अविनाश प्रताप सिंह ने बताया कि गीले और सूखे कूड़े को अलग-अलग कर जहां गीले कूड़े से खाद बनाई जा रही है, वहीं सूखे कूड़े को छांटकर उसे कबाड़ियों को बेचा जाएगा। इसके साथ ही कूड़े में इकट्ठा हो रही प्लास्टिक और पॉलिथीन को काटने के लिए प्लास्टिक कटिंग मशीन की खरीदारी की जाएगी।
नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने कहा कि मंदिरों में चढ़ाए जाने वाले फूलों से भी खाद बनाई जाएगी। इसकी शुरुआत गोरखनाथ मंदिर से हो चुकी है। यहां से निकलने वाले फूलों को इकट्ठा कर नेताजी सुभाष चंद्र बोस नगर में बने एमआरएफ में लाया जा रहा है। जल्द ही अन्य मंदिरों से भी फूलों को इकट्ठा करने का काम शुरू किया जाएगा।