बांसगांव इलाके में मारपीट के बाद बांसगांव कोतवाली में लगी समर्थकों की भीड़। फाइल
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चुनावी रंजिश को लेकर जिले में कई जगह विवाद की घटनाएं सामने आई। अगर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की तो इसका अंजाम खून खराबे में सामने आ सकता है। हालांकि, पुलिस का दावा है कि छोटे-छोटे मामले में बारीकी से जांच की जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, चुनाव की तैयारी से पहले ही शहर से लेकर देहात तक छोटे-मोटे मारपीट की घटनाएं सामने आईं। वहीं मतदान के बाद बांसगांव में बवाल इतना बड़ा कि पुलिस को लाठियां भांजनी पड़ी। इसके अलावा शहर के कई इलाकों में मारपीट की घटनाएं सामने आईं। तो कई जगह लोगों को काबू करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। बताया जा रहा है कि कई गांव में अभी चुनाव रंजिश को लेकर लोगों के मन में गुस्सा पनप रहा है। इसका उदाहरण 2017 का निकाय चुनाव भी है, जिसमें पुलिस ने शिकायत को हल्के में लिया था और फिर सहजनवां इलाके में हत्या हो गई थी।
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केस एक
बांसगांव चौराहे पर मतदान के बाद बृहस्पतिवार को भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशी के समर्थकों के बीच मारपीट हुई। इस मामले में पहले भी बात हुई थी, लेकिन पुलिस में ज्यादा ध्यान नहीं दिया और फिर से विवाद इतना बढ़ गया कि बल प्रयोग करना पड़ा।
केस दो
गोला इलाके में मतदान के दौरान ही प्रशासनिक अधिकारी के पिता ओमप्रकाश को पीटकर मनबढ़ाें ने उनका दांत तोड़ दिया । कुछ इसी तरह तिवारीपुर के माधवपुर में भी राहुल नाम के युवक का मारपीट के सिर फोड़ दिया गया।
आईजी जे रविंद्र ने कहा कि पुलिस हर छोटी घटना की गंभीरता से जांच कर रही है। प्रभावी कार्रवाई का आदेश दिया गया है। कहीं भी पुलिस की लापरवाही सामने आई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।