समाजसेवी अभिषेक सिंह ने कहा कि यह घटना भले ही एक घर में हुई है, लेकिन यह सबके लिए बड़ी सबक है। हर घर में बच्चे होते हैं और कार में बच्चों का बैठना शौक भी होता है। इसलिए अब हम सबको ध्यान देना चाहिए कि कार लॉक है या नहीं। दूसरा, बच्चा कहीं जाए तो यह जरूर पता कर लें कि वह पहुंचा है कि नहीं। मैं उस परिवार को व्यक्तिगत रूप से जानता हूं, घटना सुनने के बाद से कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा है।
यह घटना सुनकर घर में सब हैं सन्न
पड़ोसी राजन सिंह ने कहा कि घटना जब से हुई है, घर में सभी लोग बहुत दुखी हैं। घटना ने सभी को हिला दिया है। घर जाने पर एक ही चर्चा होती है कि आखिर कैसे यह सब हो गया। वह काफी तेज बच्चा था, उसकी बातें याद आ रही हैं। उसे हमेशा घर वालों के साथ ही देखा जाता था, लेकिन उस दिन ऐसा हो गया, यह सोचकर सब कोई पछतावा कर रहा है।
इसे भी पढ़ें: संतकबीरनगर कलक्ट्रेट में पौने आठ घंटे कैद रहे जिलाधिकारी, अधिवक्ताओं ने गेट पर लगा दिया था ताला
वह कैसे तड़पा होगा, सोचकर कांप गया
बिलंदपुर निवासी ज्ञानेश तिवारी ने कहा कि सबके घर में बच्चे होते हैं। अब जबकि लगभग सभी घरों में कार है, ऐसे में यह घटना सबके लिए एक बड़ी सीख भी है। किस तरह से एक छोटी सी लापरवाही जिंदगी भर का दर्द दे सकती है, इस घटना ने यह बता दिया है। इस घटना ने महिलाओं को झकझोर कर रख दिया है। सब एक ही सवाल पूछ रही हैं कि किस तरह से गर्मी में अंदर बच्चा तड़पा होगा। सच कहूं तो यह सोचकर कांप जा रहा हूं। लेकिन इस घटना से सबको सबक लेकर सीखने की जरूरत भी है।
इसे भी पढ़ें: खेल-खेल में कार में बंद हो गया मासूम, शीशों पर अंगुलियों के निशां ने बयां की आखिरी लम्हों की छटपटाहट
बिलंदपुर निवासी अजीत प्रकाश ने कहा कि आजकल के बच्चे काफी तेज होते हैं। खुद की सावधानी के साथ ही उन्हें भी कार का दरवाजा खोलने की जानकारी देनी चाहिए। कई बार तो लोग खुद ही लापरवाही कर देते हैं। कुछ दिन पहले मैं बैंक रोड के पास गया तो देखा कि एक कार में छोटे बच्चे को लॉक कर खुद ही उसकी मां पास में चली गई थीं। मुझसे देखा नहीं गया तो मैं रुका भी था, वहां पर आने पर उन्हें समझाया भी। इस घटना ने सबको यह बता दिया है कि एक लापरवाही से कैसे सब कुछ बदल सकता है।
इसे भी पढ़ें: बिग बाॅस फेम अर्शी खान का एलान: देवरिया जाएंगे, आग लगाएंगे.... प्यार में अभी और जलील होना है
सिविल लाइंस स्थित एचपी चिल्ड्रेन एकेडमी में एलकेजी के छात्र अयान की कार में दम घुटने से हुई दर्दनाक मौत से उसके सहपाठी ही नहीं, क्लास टीचर भी बहुत स्तब्ध और रुआंसे हैं। उसके अच्छे दोस्त अयांश गुप्ता और तीशा कालरा का कहना है कि हम लोग साथ ही खेलते थे। टीचर ने जब उन्हें बताया कि अब अयान नहीं आएगा तो वे गुमसुम हो गए।
अयान एलकेजी के एफ सेक्शन का छात्र था। उसके सबसे अच्छे दोस्त अयांश गुप्ता और तीशा कालरा थीं। तीनों साथ ही बैठते और खेलते थे। उनकी क्लास टीचर रूपम राय घटना से स्तब्ध नजर आईं। कहा-अयान रोज स्कूल आता था और पढ़ने में भी तेज था। अयान को याद करके वह भावुक हो गईं।
इसे भी पढ़ें: मेडिकल कॉलेज के वार्ड-14 में लगी आग, हड़कंप के दौरान आईसीयू में भर्ती मरीज की मौत
बोलीं- जब तक अपना वर्क पूरा नहीं कर लेता था, क्लास से बाहर नहीं निकलता था। हम सभी उसकी बहुत केयर करते थे। वह भी हमारी उतनी ही केयर करता था। हमेशा पूछा करता था- मैडम! आपने खाना खाया, पानी पीया? वह अपना पूरा लंच खत्म कर देता था। सभी बच्चे पानी की बोतल दूसरी जगह पर रखते थे, लेकिन वह अपने पास लेकर बैठता था और खूब पानी पीता था। सेंटर के चौथे नंबर की सीट पर वह बैठता था, उसकी सीट को देखकर विश्वास ही नहीं हो रहा कि अब वह हमारे बीच नहीं है।
अयान की दोस्त तीशा के पिता करन कालरा ने बताया कि उनकी बेटी की उससे बहुत अच्छी दोस्ती थी, अयान बहुत प्यारा था। जब वह तीशा को लेने स्कूल पहुंचते थे तो वह उन्हें देखकर मुस्कुराता रहता था। फिर बाॅय-बाॅय कहते हुए छिप जाता था। उसके स्कूल न आने से बेटी परेशान है। अयान के दोस्त अयांश के पिता अर्पित गुप्ता ने बताया कि उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा कि अयांश अब इस दुनिया में नहीं है। इस घटना ने उसे हिलाकर रख दिया है।
इसे भी पढ़ें: मुहर्रम को लेकर डायवर्जन: कल गोरखपुर शहर में नहीं आएंगे बड़े वाहन, कई रास्तों पर रिक्शा तक प्रतिबंधित
लोगों ने क्या कहा
अयान बहुत ही होनहार बच्च्चा था। इस तरह के दर्दनाक हादसे ने हम सभी को हिलाकर रख दिया है। जिस तरह से उसकी मौत हुई, सोचकर ही मन विचलित हो जाता है। हमारे स्कल में बच्चों की बहुत देखभाल की जाती है। मेन गेट पर दो लोगों की ड्यूटी लगती है। वह एक-एक बच्चे को चेक करके ही बाहर जाने देते हैं। छुट्टी होने पर बच्चे जब कक्षा से बाहर निकल जाते हैं तभी क्लास टीचर स्टॉफ रूम में जाती हैं। केयरटेकर चारों तरफ निगाह रखते हैं।
-अन्नय शाही, निदेशक एचपी स्कूल।
अयान पढ़ाई में बहुत अच्छा था, जो भी चीजें उसे समझ में नहीं आतीं, वह मुझसे पूछ लिया करता था। जिस सीट पर वह बैठता था, उसे देखकर आंखें नम हो जा रही हैं।
- रूपम राय, शिक्षिका।
अयान की मौत की खबर जब मिली तो विश्वास नहीं हो रहा था कि एक नन्हे से बच्चे के साथ इस तरह का हादसा हो जाएगा। इस हादसे ने हमें और भी सचेत कर दिया है।
-श्याम रतन, अभिभावक।