ब्लैकबोर्ड पर मौसम पूर्वानुमान सूचना देखते किसान।
- फोटो : अमर उजाला।
तकनीक के इस युग में मौसम संबंधी पूर्वानुमान ब्लैक-बोर्ड पर लिखा हुआ मिले तो यह चौंकाने वाली बात जरूर है, लेकिन गोरखपुर एनवायरमेंटल एक्शन ग्रुप (जीईएजी) के सहयोग से जंगल कौड़िया और कैंपियरगंज इलाके के गांवों में ऐसा हो रहा है। जीईएजी मोबाइल फोन पर भी संदेश भेजकर किसानों को मौसम संबंधी एक सप्ताह का पूर्वानुमान साझा कर लाभान्वित करता है।
दरअसल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से जीईएजी ग्रामीण इलाकों में किसानों को खेती संबंधी विभिन्न प्रकार की जानकारियां देता रहता है। इस कार्यक्रम के तहत गोरखपुर के जंगल कौड़िया और कैंपियरगंज के विभिन्न गांवों के अलावा बिहार के पश्चिमी चंपारण के नौतन प्रखंड के पांच गांवों के करीब चार हजार किसानों को मौमस संबंधी एक सप्ताह का पूर्वानुमान साझा किया जा रहा है। गांवों में किसान ब्लैक बोर्ड पर इसे दर्ज कर दिया जाता है ताकि दूसरे किसानों को भी लाभ मिले।
इसके अलावा किसानों को उत्पादन लागत को घटाने के साथ ही उत्पादन बढ़ाने के लिए विभिन्न जानकारियां दी जाती हैं। साथ ही पशुपालन की विभिन्न गतिविधियों के बारे में भी जानकारी दी जाती है। वहीं जीईएजी के विशेषज्ञ समय समय पर खेतों में जाकर किसानों से जानकारियां साझा करते हैं।
चार हजार किसानों को मिलता है लाभ
जंगल कौड़िया के भुईधरपुर, जिंदापुर, राखूखोर, पछगावां, बान और कैंपियरमंज के सुरस, आलमचक, मोहनाग, हरिहर के अलावा बिहार के नौतन प्रखंड के जगदीशपुर, बैकुंठवा, जाफराटोला आदि के करीब चार हजार किसानों के साथ मौसम संबंधी एक सप्ताह का पूर्वानुमान पता चल जाता है। इससे किसानों को जुताई, बुवाई, पटवन आदि करने के संबंध में जानकारी मिल जाती है। एसएमएस से किसानों को बारिश, पाला, शीतलहर आदि के संबंध में पहले से ही जानकारी हो जाती है। जिसके आधार पर किसान खेतों में पटवन से लेकर जुताई और बुवाई आदि करते हैं। इससे उन्हें आर्थिक रूप से भी काफी फायदा होता है।
जिंदापुर के किसान सुग्रीव ने बताया कि जिस दिन खेतों में पटवन करना होता है तो उसके पहले जीईएजी के विशेषज्ञ से फोन कर पूछ लेते हैं। उनके सुझाव के आधार पर ही सिंचाई करते हैं। अभी कुछ दिन पहले कुछ दिन लगातार शीतलहर चली थी। इसकी भी जानकारी जीईएजी के द्वारा दी गई। फसल को पाला से बचाने का जो भी इंतजाम करना था, उसे पहले ही कर लिया गया। मोबाइल फोन पर ही मौसम का पूर्वानुमान मिल जाता है।
सुरस के किसान बीरबल ने बताया कि मोबाइल फोन पर मौसम संबंधी जानकारी मिलने का काफी फायदा होता है। गांव के एक घर में लगे ब्लैक बोर्ड पर भी जानकारी लिख दी जाती है। इससे अन्य किसानों को भी इसकी जानकारी मिल जाती है।
गोरखपुर एनवायरमेंटल एक्शन ग्रुप के विशेषज्ञ कैलाश पांडेय ने बताया कि किसानों को महीने में हरेक छठे दिन मौसम संबंधी पूर्वानुमान भेजा जाता है। वहीं कुछ गांवों में तो वहां के किसान ब्लैक-बोर्ड पर भी मौसम संबंधी पूर्वानुमान लिख देते हैं। इसके अलावा किसानों को कृषि कार्य की लागत करने के संबंध में भी विभिन्न प्रकार की जानकारियां दी जाती हैं। इससे किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होती है।