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लॉकडाउन के दौरान परिवार हो रहा 'केबिन फीवर' का शिकार, जानें क्या है ये बीमारी

Mon, 30 Mar 2020 11:44 AM IST
vivek shukla नीरज मिश्रा, गोरखपुर।

सार

  • डॉक्टरों के पास निदान के लिए आ रहे फोन
  • सोशल मीडिया पर भी कर रहे हैं परेशानी का जिक्र
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coronavirus - फोटो : PTI
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विस्तार
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कोरोना वायरस की वजह से हुआ लॉकडाउन अब गोरखपुरियों में तनाव बढ़ा रहा है। बच्चे घर से निकलना चाहते हैं, बड़े भी परेशानी का जिक्र सोशल मीडिया पर कर रहे हैं। ज्यादातर लोगों के लिए लॉकडाउन केबिन फीवर (एक ही जगह पर फंस जाने से होने वाला तनाव) में बदल गया है।
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रुस्तमपुर के रहने वाले रोशन कुमार दुबई में इंजीनियर हैं। करीब 25 दिन पूर्व वह घर लौटे हैं। परिवार में मां-बाप, पत्नी और दो बेटे हैं। घर में बेटों की हालत अब ऐसी हो गई है कि वे अपनी मां को टीचर मैम बोलने लगे हैं।

पत्नी सुशीला कहती हैं कि अभी एक हफ्ता बीता है, आगे क्या होगा पता नहीं। यही हाल ज्यादातर घरों में है। इतना ही नहीं परिवार में तनाव भी बढ़ रहा है। राजेंद्र नगर की रहने वाले मोहन शर्मा और उनकी पत्नी रीता शर्मा दोनों प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक हैं। घर में मां-बाप, एक बेटा और एक बेटी है। बेटा दिल्ली से हाल में ही लौटा है। वह घर से नहीं निकल पा रहा है।
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परेशान हैं घर वाले

रीता शर्मा बताती हैं कि अब घर पर सारे काम खुद ही करने पड़ रहे हैं। काम वाली भी नहीं आ रही है। परिवार में कोई सहयोग नहीं कर रहा। कभी-कभी बेहद तनाव हो जाता है। दूसरी ओर कॉलेज बंद होने से घर लौटा बेटा घर के माहौल में तालमेल नहीं बैठा पा रहा है।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज मनोविज्ञान विभाग विभागाध्यक्ष डॉ. तपस ने कहा कि अब ‘केबिन फीवर’ के मामलों में सलाह के लिए फोन आने शुरू हो गए हैं। यह समस्या इसलिए है कि क्योंकि लोगों की जीवनशैली पिछले कुछ सालों में बदल गई।

उन्होंने कहा कि अचानक लॉकडाउन ने सबको एक जगह रोक दिया है। ऐसे में परिवार में लोग तालमेल नहीं बैठा पा रहे हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत युवाओं को हो रही है। बाहर पढ़ाई करने वाले युवाओं पर कोई रोक-टोक नहीं थी। अचानक घर आए और रोक-टोक बढ़ गई।
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