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धनतेरसः चमक में भी चूना...धड़ल्ले से बिके चांदी जैसे दिखने वाले नकली सिक्के, कैसे पहचान करें अपना 'सिक्का'

Wed, 30 Oct 2024 11:04 AM IST
रोहित सिंह अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
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चांदी के सिक्के - फोटो : अमर उजाला
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धंधेबाजों ने धनतेरस की भीड़ में चांदी के पुराने सिक्कों की जगह उसी जैसे दिखने वाले सिक्कों को महंगी दर पर बेच दिया। सिल्वर जैसे दिखने वाले ऐसे सिक्कों में तांबे के साथ निकल और जस्ता भी मिला है। सिल्वर की नई ढलाई के नकली सिक्कों पर एक रुपये भारतीय मुद्रा उभारकर उन्हें तैयार कराया गया है, जबकि ब्रिटिश हुकूमत में चल रहे चांदी के सिक्कों को वर्ष 1947 में ही मुद्रा के तौर पर बंद कर दिया गया था।
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वे सिक्के अब चलन में भी नहीं हैं और जिनके पास बचे भी हैं, वह धरोहर के रूप में हैं। इंग्लैंड में रानी विक्टोरिया का शासन काल 1837 से 1901 तक रहा। भारत में प्रचलित 1840 में बने चांदी के सिक्के पर एक ओर ईस्ट इंडिया कंपनी और दूसरी ओर विक्टोरिया का बिना ताज वाला चेहरा रहता था। 1857 के गदर के बाद सिक्कों पर विक्टोरिया की छवि में मुकुट आ गया। उस दौर के पुराने सिक्कों को लोग धनतेरस के दिन खरीदकर उसकी पूजा करते हैं।

चांदी के सिक्के - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सूत्र बताते हैं कि चांदी के नकली सिक्कों को राजस्थान के अलावा यूपी के आगरा में ढाला जाता है। इसमें 30 से 40 प्रतिशत तक गिलट या जर्मन सिल्वर मिक्स होता है। इन्हें चमकदार बनाने के लिए इन पर चांदी की पॉलिश कर दी जाती है। जर्मन सिल्वर या निकल सिल्वर, तांबे का एक मिक्सचर मेटल है, जिसमें निकल और जस्ता मिला होता है। इसमें 60 फीसदी तांबा, 20 फीसदी निकल और 20 फीसदी जस्ता होता है।

इसे जर्मन सिल्वर, नई चांदी, निकल, पीतल और इलेक्ट्रम नामों से भी जाना जाता है। दिखने में जर्मन सिल्वर एकदम चांदी जैसा होता है, लेकिन इसमें चांदी नाम मात्र की भी नहीं होती है।

 

धनतेरस के दिन क्यों खरीदते हैं झाड़ू ? - फोटो : अमर उजाला
सिक्कों पर कर देते हैं फर्जी नंबरिंग
चांदी की शुद्धता फाइननेस से आंकी जाती है। फाइननेस को 999, 925, 900 जैसे नंबर से मापा जाता है। यह ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स तय करता है। सिक्कों के अलावा चांदी के बर्तनों पर भी फाइननेस का नंबर होना चाहिए, लेकिन धंधेबाज इन नंबरों में भी खेल करके खूब चांदी के फर्जी सिक्कों को खपा रहे हैं। ये काम छोटे-बड़े सभी सेंटरों पर हो रहा है।

धनतेरस - फोटो : freepik
खुद से करें चांदी की कीमत का आकलन
खरीदार को मिलने वाले बिल से भी पता लग सकता है कि उसकी चांदी असली है या नकली। जैसे, चांदी की खरीद में ज्वेलरी की कीमत के अलावा मेकिंग चार्ज, हॉलमार्किंग चार्ज और जीएसटी भी बिल में जुड़ा होता है। इन सबके साथ अगर बिल मिला है तो चांदी असली है। अगर कच्चे पर्ची पर दिया है तो जीएसटी चोरी के साथ ग्राहक के साथ भी ठगी हो सकती है।

सराफा अध्यक्ष गणेश वर्मा का कहना है कि वर्तमान समय में नकली और मिलावटयुक्त धातुओं के कारण ग्राहकों को ठगे जाने की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसे देखते हुए यह व्यवस्था की गई है कि ग्राहक अपने दुकानदार से आभूषण की लैब टेस्टिंग करा सकते हैं। ग्राहक चाहें तो इसके लिए सराफा मंडल के पदाधिकारियों से भी संपर्क कर सकते हैं। ग्राहकों के आभूषण को बीआईएस अधिकृत हॉलमार्क सेंटर से जांच करवाकर निशुल्क रिपोर्ट भी उपलब्ध करवाए जाने की व्यवस्था है।


 

ऐसे करें अपने सोने की पहचान
सराफा मार्केट से जुड़े सूत्रों ने बताया कि सोना खरीदते समय भी ग्राहकों को कहा ध्यान रखा चाहिए। जैसे वर्तमान भाव से एक ग्राम के 18 कैरेट आभूषण का कुल मूल्य 6150 हजार रुपये है। इसमें 1230 (उत्पादन अपव्यय/मजदूरी) जोड़ने पर इसकी लागत 7380 रुपये हो जाएगी। इस दर पर 3 प्रतिशत की दर से जीएसटी जोड़ेंगे तो कुल भाव 7691 रु प्रति ग्राम हो जाएगा।
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धनतेरस पर सोना खरीदते समय न करें ये गलतियां - फोटो : Adobe Stock
ऐसे में 18 प्रतिशत कैरेट के एक ग्राम सोने के आभूषण का मूल्य 7690 रुपये होगा। जबकि दस ग्राम के सोने का भाव 769410 रुपये होगा। ऐसे ही कैरेट के हिसाब से गणना कर दाम का अंदाज लगा सकते हैं। कुछ आभूषणों में कारीगर लागत और उत्पादन अपव्यय की लागत 15 प्रतिशत तक हो जाती है तो ऐसे में इनके दाम थोड़ा अलग हो सकते हैं। इस गणना के साथ भी आप सोने के आभूषणों की खरीदारी कैरेट के।हिसाब से कर सकते हैं।
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