इसके बाद लखनऊ के व्यापारी ने सात जनवरी को सभी दवाएं वापस भेज दीं। फिर गोरखपुर के दो दवा दुकानदारों (दवा मंगाने वाले व उससे दवा खरीदने वाले) के बीच रुपयों को लेकर विवाद हो गया। इसके बाद मामले की जानकारी ड्रग विभाग के पास पहुंच गई। विभाग ने मामले में जांच शुरू कर दी है। लेकिन जांच से पहले दवाएं भालोटिया से गायब कर दी गई है।
नकली दवाओं को मांगने और उसे बेचने के मामले में दो सगे भाईयों समेत सात दवा व्यापारी विभाग की रडार पर हैं। विभाग उनके दस्तावेजों को खंगालने में जुट गया है। विभाग की माने तो चार से पांच दिनों के अंदर मामले का खुलासा कर दिया जाएगा। इस खुलासे में कई व्यापारियों के नाम आने के संकेत भी मिले हैं।
ट्रैक किया जा रहा है दवाएं कहां-कहां गई
36 लाख की नकली दवाओं में 18 लाख की दवाएं बिक भी गई है। ऐसे में अब विभाग बिकी हुई दवाओं को ट्रैक करने में जुट गया है, जिससे की समय रहते दवाओं की खेप को आम आदमी तक पहुंचने से रोका जा सके। क्योंकि बताया जा रहा है कि कई मेडिकल स्टोरों पर यह दवाएं पहुंच चुकी है। ऐसे में इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि यह दवाएं आम आदमी तक न पहुंची हों।