गोरखपुर शहर के भालोटिया मार्केट में नकली दवाओं के खेल में एक नया व्यापारी शामिल है। उसने पुराने दवा व्यापारियों की मदद से नकली दवाओं की खेप मंगाई है। यह खेल पिछले कई महीनों से चल रहा था। बताया जा रहा है कि व्यापारी ने ब्रांडेड कंपनियों की दवाओं का पूरा डाटा इकट्ठा कर उसे फैक्ट्रियों में बनवाया है।
इस काम में उसे अन्य लोगों को कमीशन भी नहीं देने पड़े हैं। यही वजह है कि उसने हाथों-हाथ दवाएं व्यापारियों को सस्ते दामों में बेचकर 50 प्रतिशत से अधिक का मुनाफा कमा लिया है। वहीं, दूसरी ओर विभाग का दावा है कि जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक, गोरखपुर के एक व्यापारी ने करीब 36 लाख रुपये की ब्रांडेड कंपनियों की दवाएं मंगाईं। इनमें से करीब 18 लाख की दवाएं एक बड़ी पार्टी ने लेकर लखनऊ भेज दिया। दिखाए गए सैंपल से बैच नंबर मैच नहीं होने पर जांच की गई तो पता चला कि दवाएं नकली हैं।
इसके बाद लखनऊ के व्यापारी ने सात जनवरी को सभी दवाएं वापस भेज दीं। फिर गोरखपुर के दो दवा दुकानदारों (दवा मंगाने वाले व उससे दवा खरीदने वाले) के बीच रुपयों के बारे में विवाद हो गया। इसके बाद मामले की जानकारी ड्रग विभाग के पास पहुंच गई। विभाग ने मामले में जांच शुरू कर दी है, लेकिन जांच से पहले दवाएं भालोटिया मार्केट से गायब कर दी गई हैं।
जांच के बाद पता चलेगा दवा के साल्ट की हकीकत
नकली दवाओं के मामले में विभाग ने फैसला लिया है कि दवा मिलने के बाद उसके साल्ट की जांच होगी। जांच के बाद पुख्ता तौर पर पता चल सकेगा कि आखिरकार दवाओं में क्या मिलाया गया। सही साल्ट का प्रयोग हुआ या नहीं। अगर ऐसा नहीं होता है तो दवाएं अधोमानक भी हो सकती हैं, जो जानलेवा साबित हो सकती हैं।
कई चेहरे हो सकते हैं बेनकाब
नकली दवा के मामले में कई चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। इस खेल में केवल एक व्यापारी की भूमिका नहीं है। इस काम में कई लोग भी शामिल हैं, जो अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में नकली दवाओं को बेचने का काम कर रहे हैं।
पंजाब और गुजरात की भी हो सकती हैं दवाएं
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के अलावा भालोटिया में गुजरात और पंजाब से भी दवाएं मंगाई जाती हैं। खास बात यह है कि इन चारों राज्यों से व्यापारी खुद का साल्ट बताकर दवाएं बनवाने का काम करते हैं। हाल में ही चारों राज्यों में नई-नई फैक्ट्रियां खुली हैं। जहां पर दवा व्यापारियों ने आर्डर भी दिए हैं।
लखनऊ तक हो रही जांच
गोरखपुर के अलावा मामले की जांच लखनऊ तक शुरू कर दी गई है। लखनऊ में भी कुछ व्यापारियों के रिकॉर्ड विभाग ने मंगाए हैं। देखा जा रहा है कि पिछले एक पखवारे में लखनऊ से कौन-कौन से व्यापारियों ने दवाएं मंगाईं हैं। इसके अलावा निजी गाड़ियों से दवा मंगाने वालों के भी रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।
सहायक औषधि आयुक्त एजाज अहमद ने बताया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। किसी को बख्शा नहीं जाएगा। हर गतिविधियों पर विभाग की नजर है। जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा।