- डीडीयू के चपरासी शनि शर्मा की ओर से फर्जी आईपीएस बनकर वसूली करने का मामला
- विज्ञान संकाय के एक शिक्षक से उनकी पत्नी के ट्रांसफर के नाम पर लिए 40 हजार रुपये, नहीं लौटाए
- आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को धमका कर वसूलता था चाय-पानी के पैसे
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के चपरासी शनि शर्मा पर हर रोज नए तथ्य सामने आ रहे हैं। जिस विश्वविद्यालय में वह कर्मचारी था, वहां भी शिक्षकों, कर्मचारियों से लेकर आउटसोर्सिंग कर्मचारियों तक से ठगी की। एक शिक्षक से तो उनकी पत्नी के ट्रांसफर के नाम पर 40 हजार रुपये ऐंठ लिए। थक-हारकर शिक्षक ने पैसे मांगने ही छोड़ दिए।
विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय के शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि करीब दो वर्ष पहले उनसे पैसे लिए थे। कई बार कहने के बाद भी उसने पैसे वापस नहीं किए। शनि ने उनका फोन भी उठाना बंद कर दिया। बताया जा रहा है कि संबंधित शिक्षक की पत्नी तब दूसरे जिले में सरकारी सेवा में नियुक्त थीं। शनि शर्मा ने आश्वासन दिया था कि अपनी पहुंच के बल पर वह कुछ ही दिनों में ट्रांसफर करा देगा। इसके बाद शिक्षक ने पैसे दिए थे। कई महीने बीतने के बाद शिक्षक को ठगी का पता चला।
विश्वविद्यालय में तैनात एक आउटसोर्सिंग कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उसे नौकरी से निकलवाने की धमकी देकर खर्च के लिए अक्सर पैसे लेता था। उसके खिलाफ शिकायत की कभी हिम्मत नहीं कर पाया। कई कर्मचारियों को उसने इमोशनली ब्लैकमेल कर 500 से 2000 रुपये तक लिए। चपरासी के कारनामों को लेकर विश्वविद्यालय में इस समय खूब चर्चाएं हो रही हैं।
अनुकंपा पर हुई थी नियुक्ति
शनि शर्मा के पिता स्व. रामकृष्ण शर्मा विश्वविद्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे। उनके निधन के बाद लगभग 12 वर्ष पहले अनुकंपा के आधार पर शनि की नियुक्ति चपरासी के पद पर हुई थी।
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कोट
निलंबित कर्मचारी के खिलाफ कई शिकायतों की जांच चल रही है। फर्जी आईपीएस केस को भी जांच में शामिल किया जाएगा। यदि कोई शिकायत करता है तो मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, डीडीयू