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कार्रवाई पर निर्णय लेगी स्थायी शैक्षणिक समिति, मई में बैठक में रखा जाएगा एजेंडा
डॉक्टर पर फर्जी डिग्री और इंटरव्यू के पहले तथ्यों को छिपाने जैसे गंभीर आरोप, चल रही जांच
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में तैनात एक डॉक्टर की डिग्री और अनुभव प्रमाण पत्र के फर्जी होने की चल रही जांच में अब एम्स प्रशासन को विधिक राय मिल गई है। इस मामले को मई में प्रस्तावित स्थायी शैक्षणिक समिति में रखा जाएगा। समिति विधिक राय को संज्ञान में लेने के बाद निर्णय लेगी। सूत्राें की मानें तो अब डॉक्टर के साथ नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल लोग भी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं। डॉक्टर की नौकरी भी जा सकती है।
एम्स प्रशासन के पास मार्च 2023 में शिकायत आई थी कि तैनात किए जा रहे एक डॉक्टर ने डिग्री और अनुभव प्रमाणपत्र फर्जी लगाया है। इसके बाद एम्स प्रशासन ने जांच शुरू करा दी। जांच के दौरान पता चला कि जिस डॉक्टर की शिकायत हुई है, एम्स ऋषिकेश में भी उस डॉक्टर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जांच चल रही है। डॉक्टर ने नियुक्ति के समय ये तथ्य छिपाए थे।
यही नहीं, डॉक्टर ने अपनी एमडी की डिग्री साल 2009 में मिली बताई। इस आधार पर नियुक्ति में अनुभव का लाभ लिया। जबकि, जांच में पाया गया कि डॉक्टर को 2011 में एमडी की डिग्री मिली थी। इस हिसाब से उनके पास एम्स में नियुक्ति के लिए पर्याप्त अनुभव नहीं है। जांच में यह भी पाया गया कि डॉक्टर ने जो डी-लिट की डिग्री कैलिफोर्निया पब्लिक यूनिवर्सिटी से प्राप्त की है, उस नाम का कोई भी अप्रूव कोर्स यूनिवर्सिटी में नहीं है।
एम्स एवं जांचकर्ता सदस्य गवर्निंग काउंसिल डॉ. अशोक जाह्नवी प्रसाद ने जांच रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्रालय को भेज दी थी। इस मामले में एम्स प्रशासन ने हाईकोर्ट के अधिवक्ता विद्यानाथ शुक्ल से विधिक राय मांगी थी। 25 अप्रैल 2024 को रिपोर्ट एम्स प्रशासन को मिल गई है। सूत्रों की माने तो विधिक राय में विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही गई है।
वर्जन
डॉक्टर की नियुक्ति प्रकरण में जांच रिपोर्ट भेजकर हाईकोर्ट के अधिवक्ता से विधिक राय मांगी गई थी। रिपोर्ट अब मिल गई है। मई के अंतिम सप्ताह में स्थायी शैक्षणिक समिति की बैठक प्रस्तावित है। इसमें पूरे मामले को रखा जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ जीके पाल, एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर, एम्स