फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gorakhpur News: प्रेमचंद की 'ईदगाह' पर कल लगेगा मेला- जानिए किससे प्रभावित हो नौकरी छोड़ बने साहित्यकार

Wed, 10 Apr 2024 10:56 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
विज्ञापन
मुंशी प्रेमचंद की जयंती है आज। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

प्रेमचंद को तो आप बखूबी जानते ही होंगे। जी हां, वही कथा सम्राट प्रेमचंद, जिनकी नॉवेल और कहानियां आज भी साहित्य जगत में अपनी अलग पहचान रखती हैं। जिन्होंने गोरखपुर में महात्मा गांधी के भाषण से प्रभावित होकर सरकारी नौकरी तक छोड़ दी थी।

विज्ञापन


मुंशी जी के नाम से भी मशहूर इस साहित्यकार ने गोरखपुर को भी अपनी लेखनी के जरिए कई किताबों और कहानियों में जगह दी है। उनमें से ही एक कहानी है ईदगाह। ईद का मौका है और गोरखपुर का जुड़ाव भी है, ऐसे में इसकी चर्चा होना भी जरूरी है। प्रेमचंद की इस ईदगाह पर कल यानि कि गुरुवार को बड़ा मेला लगेगा।

ईद की नमाज पढ़ने के लिए दरगाह मुबारक खां शहीद ईदगाह पर लोगों का हुजूम उमड़ेगा, जहां हामिद जैसे कई मासूम नमाज अद करने के लिए पहुंचेंगे। दरगाह मुबारक खां शहीद से जुड़े सैयद शहाब ने बताया कि ईद की खुशियों में यूं तो सभी शामिल होंगे। लोगों ने इसके लिए सदका, जकात और फितरे के जरिए लोगों को ईद के जश्न में शामिल होने की कोशिश भी की है।
विज्ञापन


लेकिन अगर मुंशी जी के हामिद के जैसा कोई आपको नजर आ जाए तो उसकी मदद जरूरी हो जाती है। नमाज के बाद बाहर दुकानें सजी रहती हैं। मेले जैसा माहौल रहता है, जिसमें बच्चों के लिए लगी दुकानों पर नन्हें-मुन्ने अपने पसंदीदा खिलौने लेने के लिए उमड़ते हैं। इसमें वह लोग भी शामिल होते हैं, जिन्हें बड़ी मुश्किल से ईद की खुशियां नसीब हुई हैं, ऐसे में बेफजूल खर्च कर वह अपना बोझ नहीं बढ़ाना चाहते हैं।

मुंशी प्रेमचंद की ईदगाह में हामिद का किरदार भी कुछ ऐसा ही था। उसके दोस्तों ने महंगे खिलौने खरीदे, लेकिन उसने बजाए खिलौनों के एक चिमटा खरीदा, जिससे रोटी बनाते समय उसकी मां का हाथ न जले।

दरगाह के सदर इकरार अहमद ने बताया कि इस बार दरगाह मुबारक खां शहीद पर ईद की नमाज का वक्त सुबह 8 बजे तय किया गया है। नमाजियाें की भीड़ सुबह 7 बजे से ही इकट्ठा होना शुरू हो जाएगी। ऐसे में जिन्हें भी नमाज पढ़नी है वह पहले से आए और जगह के हिसाब से बैठता जाए, ताकि बाद में आने वालों को भी परेशानी का सामना न करना पड़े।

प्रेमचंद निकेतन के सचिव मनोज सिंह की मानें तो ईदगाह में लिखा गया हामिद का किरदार काफी दमदार और हकीकत के करीब है। काफी ऐसे लोग होते हैं, जो पैसा कम होने की वजह से चाहकर भी अपने बच्चों को खिलौना या कोई सामान नहीं दिला पाते, जबकि उनकी ऐसा करने की इच्छा होती है।

उन्होंने बताया कि मुंशी जी प्रेमचंद पार्क स्थित सदन में रहा करते थे, वहां से उनका आसपास आना-जाना भी होता था, तो ईद की नमाज का मंजर उन्होंने देखा और इसको ही ध्यान में रखते हुए ईदगाह की कहानी लिखी। हर साल ईद पर यह कहानी लोगों के जहन में आती है और उन्हें झकझोर जाती है।


शबे कद्र में मांगी जहन्नम से आजादी की दुआ
माह-ए-रमजान का 29वां रोजा अल्लाह की इबादत में बीता। तरावीह की नमाज अदा की गई। नमाज व कुरआन-ए-पाक की तिलावत हुई। खूब दुआएं मांगी गईं। सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार के इमाम हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि रमजानुल मुबारक रुखसत हो रहा है, जिसकी हर घड़ी रहमत भरी है।

रोजाना लाखों-करोड़ों गुनहगारों की मगफिरत हो जाती है। ऐसा महीना खत्म हो रहा है। अब ईद की खुशियों में सबको शामिल करें।
नायब काजी मुफ्ती मो. अजहर शम्सी ने कहा कि अगर आप मालिके निसाब हैं, तो हकदार को जकात जरूर दें, क्योंकि जकात न देने पर सख्त अजाब का बयान कुरआन-ए-पाक में आया है। जकात हलाल और जायज तरीके से कमाए हुए माल से दी जाए। ईद की नमाज से पहले-पहले सदका-ए-फित्र अदा कर दें।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें