गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में विषम सेमेस्टर की परीक्षा पद्धति में बदलाव को लेकर छात्रों ने आपत्ति जताई है। पहले, तीसरे व पांचवें सेमेस्टर की परीक्षा को एमसीक्यू के बजाय वर्णनात्मक कराने की तैयारी के बीच छात्रों ने पूर्व की तरह वस्तुनिष्ठ पैटर्न जारी रखने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि अब तक एमसीक्यू पैटर्न पर परीक्षा देने के बाद अचानक बदलाव से प्रदर्शन और सीजीपीए प्रभावित हो सकता है। इससे आगे ऑनर्स डिग्री की पात्रता पर भी असर पड़ने की आशंका है।
विवेक यादव ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस वर्ष भी विषम सेसेस्टर की सभी परीक्षाएं एमसीक्यू पैटर्न पर कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से परीक्षाएं इसी पैटर्न पर होती आ रही हैं। ऐसे में परीक्षा के बीच अचानक डिस्क्रिप्टिव पैटर्न लागू करना छात्रों के लिए परेशानी पैदा करने वाला निर्णय है। उन्होंने कहा कि छात्र इस व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेंगे और पूर्व की तरह एमसीक्यू पैटर्न पर ही सभी पेपर कराने की मांग करते हैं।
आयुष उपाध्याय ने कहा कि छात्रों की मांग है कि पांचवें सेमेस्टर की परीक्षा भी एमसीक्यू (ऑब्जेक्टिव) पैटर्न पर ही आयोजित की जाए। पिछले चार सेमेस्टर से लगातार इसी पैटर्न पर परीक्षाएं होती रही हैं। ऐसे में अचानक परीक्षा पद्धति बदलने से छात्रों के प्रदर्शन और सीजीपीए पर असर पड़ सकता है। सीजीपीए में कमी का प्रभाव आगे चलकर ऑनर्स डिग्री की पात्रता पर भी पड़ सकता है। छात्रों के शैक्षणिक हित और परीक्षा पद्धति की निरंतरता को ध्यान में रखते हुए पांचवें सेमेस्टर में भी एमसीक्यू पैटर्न जारी रखा जाए।
राजवीर प्रताप शाही ने कहा कि पिछले चार सेमेस्टर से लगातार एमसीक्यू पैटर्न पर परीक्षाएं हुई हैं। ऐसे में पांचवें सेमेस्टर में अचानक परीक्षा पद्धति बदलने से छात्रों के प्रदर्शन और सीजीपीए पर असर पड़ सकता है। इससे आगे ऑनर्स डिग्री की पात्रता भी प्रभावित होने की आशंका है।