ड्रग विभाग की टीम ने लेबोरेट फॉर्मास्युटिकल के यहां छापा मारने के दौरान प्रसव पीड़ा में इस्तेमाल की जाने वाली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन को बरामद किया था। यह इंजेक्शन दो से आठ डिग्री सेल्सियस में रखा जाना चाहिए था, लेकिन टीम को फर्श पर मिला था। इस पर टीम ने 5.91 लाख रुपये के इंजेक्शन जब्त कर लिए थे। इसकी सूचना टीम ने बुधवार को न्यायालय में दी है।
रिकॉर्ड देने में देरी खड़े कर रहे कई सवाल
जिस तरह मैनकाइंड ने 10 मिनट के अंदर तीन साल की खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड उपलब्ध करा दिया। उसी तरह किसी अन्य दवा व्यापारी ने अब तक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया है। जबकि, सभी व्यापारियों के यहां कंप्यूटर लगे हुए हैं। व्यापारी चाहें तो एक क्लिक पर रिकॉर्ड उपलब्ध करा सकते हैं, लेकिन लेबोरेट फॉर्मास्युटिकल की तरफ से चार दिन बीत जाने के बाद भी रिकॉर्ड उपलब्ध न कराना कई सवाल खड़े कर रहा है।
सूचना न देने पर की जाएगी कानूनी कार्रवाई
ड्रग इंस्पेक्टर जय सिंह ने बताया कि लेबोरेट फॉर्मास्युटिकल ने समय बीत जाने के बाद भी खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड नहीं दिया है। इसके लिए उन्हें फिर से रिमाइंडर भेजा जाएगा। इसके बाद भी अगर कोई कागजात नहीं मिलते हैं तो ड्रग एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
लेबोरेट फार्मास्युटिकल मनीष केडिया ने कहा कि कंपनी से कागजात मांगे गए हैं। शुक्रवार तक सभी कागजात मिल जाएंगे, फिर ड्रग विभाग की टीम को उपलब्ध करा दिए जाएंगे। जिस दिन कागजात मांगे गए थे, उसी दिन कंपनी को ईमेल से सूचना भेज दी गई थी।