लेफ्टिनेंट कर्नल मनीषा तिवारी की ओर से पुलिस को दी गई तहरीर के मुताबिक, 26 मई की रात करीब 8:45 से 8:55 बजे के बीच एम्स के गेट नंबर-4 के पास दो अज्ञात लोगों ने उनके निजी अनुचर (सेवक) गुरप्रीत सिंह को रोक लिया। आरोप है कि दोनों ने उससे मनीषा तिवारी और उनके परिवार के सदस्यों, उनके आने-जाने के समय, आवास तक पहुंचने के रास्तों के बारे में जानकारी मांगी।
एम्स गोरखपुर में प्रतिनियुक्त भारतीय सेना की लेफ्टिनेंट कर्नल एवं अधीक्षण अभियंता मनीषा तिवारी ने अज्ञात लोगों पर जासूसी का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अज्ञात लोगों ने उनके अनुचर को घेरकर परिवार के बारे में पूछा। लेफ्टिनेंट कर्नल ने गोपनीय दस्तावेज चोरी की आशंका और जान-माल का खतरा होने का आरोप लगाते हुए एम्स थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है।
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मनीषा तिवारी ने आरोप लगाया है कि एम्स में कार्यरत कुछ लोगों की मिलीभगत से पिछले करीब डेढ़ वर्ष से उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने निजी और गोपनीय दस्तावेज चोरी किए जाने की भी आशंका जताई है।
लेफ्टिनेंट कर्नल मनीषा तिवारी की ओर से पुलिस को दी गई तहरीर के मुताबिक, 26 मई की रात करीब 8:45 से 8:55 बजे के बीच एम्स के गेट नंबर-4 के पास दो अज्ञात लोगों ने उनके निजी अनुचर (सेवक) गुरप्रीत सिंह को रोक लिया। आरोप है कि दोनों ने उससे मनीषा तिवारी और उनके परिवार के सदस्यों, उनके आने-जाने के समय, आवास तक पहुंचने के रास्तों के बारे में जानकारी मांगी।
शिकायत में कहा गया है कि जब गुरप्रीत सिंह ने घटना की सूचना देने के लिए मोबाइल से फोन करने का प्रयास किया तो आरोपियों ने मोबाइल छीन लिया। इसके बाद उसे किसी को जानकारी देने पर गंभीर परिणाम भुगतने और जान से मारने की धमकी दी गई। भयभीत होने पर वह वहां से चला गया।
मनीषा तिवारी ने आशंका जताई है कि इस पूरे प्रकरण के पीछे कुछ प्रभावशाली लोगों की साजिश हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा है कि एक सैन्य अधिकारी को ब्लैकमेल कर अनुचित कार्य कराने की मंशा से ऐसी गतिविधियां कराई जा सकती हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से गंभीर विषय है।
एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि लेफ्टिनेंट कर्नल की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच की जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी शिकायत करने का दावा
मनीषा तिवारी ने तहरीर में उल्लेख किया है कि गोपनीय दस्तावेजों की कथित चोरी और संदिग्ध गतिविधियों की शिकायत पहले भी की गई थी, लेकिन उस पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।