गोरखपुर। गीडा में उद्यमियों के सामने आ रही अड़चनों को दूर करने की मांग तेज हो गई है। चैंबर आफ इंडस्ट्रीज के पदाधिकारियों ने औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी को पत्र भेजकर शासन स्तर पर लंबित पांच प्रमुख समस्याओं के त्वरित समाधान की मांग की है।
इनमें कंपनी के पुनर्गठन पर स्टांप शुल्क, भूमि बंधक की एनओसी, उत्पादनरत प्रमाणपत्र, औद्योगिक भवनों के नक्शे और हाउस टैक्स से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं।
चैंबर आफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आर एन सिंह ने बताया कि कंपनी के नाम या अंशधारिता में बदलाव और एकल स्वामित्व से कंपनी या फर्म में बदलाव की स्थिति में दोबारा पट्टा विलेख की जरूरत खत्म करने का निर्णय वर्ष 2023 में विचाराधीन था। यूपीसीडा की बैठक के बाद मामला न्याय विभाग के विधिक परामर्श के लिए भेजा गया लेकिन 28 माह बाद भी इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है। मामले में शीघ्र निर्णय लेने की मांग की गई है। इसके अलावा भूमि प्रीमियम का पूरा भुगतान करने के बाद बैंक से वित्त पोषण लेने पर प्राधिकरण भूमि बंधक के लिए एनओसी जारी करता है। छोटे उद्यमियों के लिए सुझाव दिया गया है कि पूर्ण भुगतान के बाद ऐसी एनओसी जारी हो, जिसमें उद्यमी को किसी भी वित्तीय संस्था के पक्ष में भूमि बंधक रखने की अनुमति हो और केवल प्राधिकरण को सूचना देना पर्याप्त हो।
नगर निगम क्षेत्र में आने वाले औद्योगिक क्षेत्रों में मेंटेनेंस के नाम पर लिया जाने वाला हाउस टैक्स गीडा और यूपीएसआइडीए के औद्योगिक क्षेत्रों की तुलना में कई गुना अधिक है।
गीडा और यूपीएसआइडीए के समान दर लागू करने के साथ औद्योगिक भवनों के मानचित्र स्वीकृति शुल्क में भी एकरूपता की मांग की है। मंत्री से मिलने वालों चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष एसके अग्रवाल, प्रवीण मोदी, दीपक कारीवाल, अशोक शाव आदि प्रमुख रहे।