गीडा की कुछ फैक्ट्रियों से निकलने वाली राख क्षेत्रीय लोगों के अलावा उद्योगपतियों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। राख से न सिर्फ गंदगी फैल रही है, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी खतरनाक है। ठंड के मौसम में राख वातावरण के निचले हिस्से में जम जाती है, जिस कारण काफी असुविधा होती है। उद्यमियों ने गीडा सीईओ से मिलकर इस समस्या का समाधान कराने की मांग की है।
गीडा में 12 ऐसी फैक्ट्रियां हैं, जहां उत्पादन के लिए उच्च तापमान की जरूरत होती है। इसके लिए भूसी का इस्तेमाल किया जाता है। इस दौरान चिमनी से बड़ी मात्रा में राख निकलती है। आसपास स्थित इकाइयों में उड़कर पहुंचने वाली राख से लोग परेशान हैं। अनुमान के मुताबिक इन फैक्ट्रियों में प्रतिदिन लगभग 260 टन धान की भूसी का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे करीब 100 टन राख निकलती है।
राख को उड़ने से रोकने तथा उसे सुरक्षित तरीके से एकत्र करने के लिए इकाइयों में डस्ट कलक्टर लगाया गया है। प्रभावित उद्यमियों का आरोप है कि बिजली की खपत कम करने के लिए फैक्ट्रियों में डस्ट कलक्टर को चालू नहीं किया जा रहा है। इससे राख उड़कर दूसरी इकाइयों तक पहुंच जा रही है।
गीडा सीईओ संजीव रंजन ने बताया कि कई औद्योगिक इकाइयों में धान की भूसी का इस्तेमाल होता है। कुछ उद्यमियों को इसकी राख से परेशानी है। उनकी ओर से उत्पाद खराब होने की बात भी कही जा रही है। जल्द ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा भूसी का उपयोग करने वाली इकाइयों के अधिकारियों के साथ वार्ता कर उद्यमियों की समस्या का समाधान किया जाएगा।