निजीकरण, पुरानी पेंशन बहाली, इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 में किए जा रहे संशोधनों के विरोध में बुधवार को बिजली निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार किया और मोहद्दीपुर स्थित मुख्य अभियंता कार्यालय के समक्ष धरना दिया। आंदोलन के चलते बिजली बिल भी जमा नहीं हो सके। बिल जमा करने गए लोगों को वापस लौटना पड़ा।
बिजली कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से आयोजित धरने को संबोधित करते हुए ई. अरविंद सिंह ने कहा कि संघर्ष समिति की प्रमुख मांग है कि केरल एवं हिमाचल की भांति ऊर्जा निगमों का एकीकरण कर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद का पुनर्गठन किया जाए। वर्ष 2000 में 75 करोड़ रुपये के घाटे को खत्म करने के लिए विद्युत परिषद को तोड़ा गया था, वही घाटा अब बढ़कर 85000 करोड़ हो गया है।
प्रभुनाथ प्रसाद ने कहा कि हमें जागरूक होकर अपने अधिकारों के लिए लडऩा होगा। अध्यक्षता करते हुए अजय कुमार ने कहा कि इस एक्ट के लागू हो जाने से निजी कंपनियां भारी मुनाफे के साथ बिजली वितरण करेंगी। इसका बोझ आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ेगा। धरने को ई. एके खान, राम जनक सिंह, अखिलेश गुप्ता, रामकिशन, राम अवतार यादव, प्रिंस पाठक, नरसिंह मौर्य, ईं ऐश्वर्य सिंह ने भी संबोधित किया। संचालन दीपक गुप्त ने किया।
इस अवसर पर जितेंद्र नाथ, शशि कपूर, विजय सिंह, एके सिंह, सुशील कुमार, प्रमोद यादव, अजय गुप्ता, कृष्ण मोहन यादव, विनय यादव, राहुल शर्मा, मुकेश यादव, सुजीत सिंह आदि उपस्थित रहे।