गोरखपुर में अब बिजली बिल बनाने का काम बंगलुरु की कंपनी क्वैस क्राप करेगी। बिजली निगम ने अक्तूबर से नई व्यवस्था को लागू कर दिया है। अभी तक बिजनेस कंसल्टिंग एंड आईटी सॉल्यूशंस (बीसीआईटीएस) के पास बिजली बिलिंग की जिम्मेदारी थी। इसका अनुबंध 30 सितंबर को समाप्त हो जाएगा। निगम के आला अधिकारी बताते हैं कि बिल बनाने में लापरवाही के कारण बीसीआईटीएस का अनुबंध आगे नहीं बढ़ाया गया।
जानकारी के अनुसार, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम गोरखपुर जोन के 13 वितरण खंडों के तकरीबन 20 लाख बिजली उपभोक्ताओं को निर्धारित समय पर मीटर रीडिंग के आधार पर बिल बनाने की जिम्मेदारी तीन साल पहले बीसीआईटीएस को दी गई थी। बिलिंग एजेंसी ने शुरुआत में ठीक काम किया, लेकिन बाद में उसके मीटर रीडरों की लापरवाही बढ़ गई। उनकी शिकायतें बढ़ने लगीं। उपभोक्ता उपखंड कार्यालय पर घर बैठे बिजली बिल बनाने की शिकायतें लेकर आने लगी।
इस संबंध में खंड के अभियंता भी लगातार एजेंसी के जिम्मेदारों को पत्र लिखकर चेतावनी देते रहे। अधीक्षण अभियंता शहरी की तरफ से फर्म को निर्देशित भी किया गया। इसके बाद कंपनी ने कुछ मीटर रीडरों को बाहर का रास्ता दिखाया, लेकिन स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ। करीब डेढ़ वर्ष पहले ऊर्जा निगम के तत्कालीन चेयरमैन ने बिलिंग एजेंसी की निगम विरोधी कार्यप्रणाली की रिपोर्ट अफसरों से मांगी। तत्कालीन मुख्य अभियंता ने खंडों से सूचना मंगाकर 550 पेज की रिपोर्ट भेजी। तभी से माना जा रहा था कि बीसीआईटीएस से अनुबंध समाप्त होने के बाद निगम उससे दोबारा करार नहीं करेगा।
अधीक्षण अभियंता शहरी यूसी वर्मा ने बताया कि उपभोक्ताओं की लगातार शिकायतें बिजली बिल को लेकर आ रहीं थीं। स्थानीय स्तर पर निर्देश देने के अलावा शीर्ष अधिकारियों ने भी चेतावनी दी गई थी। निगम उपभोक्ताओं की सुविधाओं में मनमानी करने वाले जिम्मेदारों पर सख्ती से कार्रवाई जरूर करेगा।
मुख्य अभियंता लगा चुके हैं जुर्माना
मंडल के चारों जिलों के 50 हजार से ज्यादा बिजली कनेक्शन पर औसत बिल बनाने के मामले में पांच अप्रैल को निगम ने बड़ी कार्रवाई की थी। तत्कालीन मुख्य अभियंता देवेंद्र सिंह ने बिलिंग एजेंसी बिजनेस कंसल्टिंग एंड आईटी सोल्यूशंस (बीसीआईटीएस) पर 44 लाख 78 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। उन्होंने जुर्माना, भुगतान के लिए किए गए फर्म के आवेदन और जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की थी।