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दिमागी कसरत, आंकड़ों की बाजीगरी है चुनावी प्रबंधन : प्रो सक्सेना

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दिमागी कसरत, आंकड़ों की बाजीगरी है चुनावी प्रबंधन : प्रो. मुकुल
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गोरखपुर। प्रो. कर्नल मुकुल सक्सेना ने कहा कि चुनावी प्रबंधन एक दिमागी कसरत है, आंकड़ों की बाजीगरी है। ऐसे में एक शैक्षणिक संस्थान में स्थापित इलेक्शन सेल की अहमियत बढ़ जाती है, जो रिसर्च को केंद्र में रखकर राजनीतिक पार्टियों को अपनी सेवाएं दे सकें।
प्रो. सक्सेना कौटिल्य स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी, जीआईटीएएम यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद में कार्यरत हैं। बृहस्पतिवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से कार्यशाला का आयोजन हुआ। बतौर मुख्य वक्ता प्रो. मुकुल ने संवाद भवन में विद्यार्थियों को चुनाव के दौरान जनमत निर्माण, चुनावी प्रबंध और रणनीति का मूलमंत्र समझाया। प्रो रूसी राम महानंदा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस अवसर पर सिद्धार्थनगर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. रजनीकांत पांडेय, प्रो. विनीता पाठक, डॉ. अमित उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
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भाषण, स्लोगन, विज्ञापन प्रभावित करते हैं
प्रो सक्सेना ने कहा कि दिमाग के अंदर डर, उम्मीद, गुस्सा, खुशी, असुरक्षा का भाव एक वोटर के दिमाग में भी चल रहा होता है। वहीं नेताओं के भाषण, स्लोगन, चुनावी घोषणा पत्र, विज्ञापन सरीखे फैक्टर वोटर के दिमाग को प्रभावित करते हैं। विद्यार्थियों ने चुनावी प्रबंधन से जुड़े सवाल पूछे, जिसका एक्सपर्ट ने बड़ी ही सहजता से जवाब दिया।
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