धोखे से घर अपने नाम करवा लिया तो मान्य नहीं
यदि किसी बेटे ने माता या पिता को बहला-फुसलाकर धोखे से अपने नाम उनकी प्रॉपर्टी करवा ली है तो यह मान्य नहीं है। अभिभावक इसकी शिकायत करते हैं तो जिला प्रशासन उन्हें वापस कब्जा दिलवा सकता है। प्रशासन से सहयोग न मिलने पर अभिभावक कोर्ट में केस लगा सकते हैं।
यह हो सकती है सजा
- मां-बाप को बाहर निकालने पर तीन महीने तक की सजा का प्रावधान है, जमानत जल्दी नहीं मिलती।
- ऑर्डर के बाद भी कोई बच्चा अपने पेरेंट्स को गुजारा भत्ता नहीं देता, तो उसे एक माह का कारावास हो सकती है।
कानपुर में पुलिस ने दिलाया था बुजुर्ग दंपती को त्वरित न्याय
अगस्त 2021 को कानपुर पुलिस के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर असीम अरुण के पास एक बुजुर्ग दंपती, बेटे-बहू की शिकायत लेकर पहुंचे थे। कमिश्नर ने जरा भी देरी नहीं की और खुद ही दोनों को लेकर उनके घर पहुंच गए। सुरक्षा दी और बेटे-बहू को घर से बाहर कर दिया। इस घटना से गोरखपुर पुलिस क्यों सबक नहीं लेती, उसके पास भी वही कानूनी अधिकार हैं, जो कानपुर पुलिस के पास है। बस मामला इच्छा शक्ति का है। क्या वैसी ही इच्छा शक्ति गोरखपुर पुलिस नहीं दिखा सकती ?
एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने कहा कि रामगढ़ताल पुलिस को निर्देशित किया गया है कि बुजुर्ग के प्रार्थनापत्र पर नियमानुसार कार्रवाई करें। इसके बाद भी लापरवाही सामने आई तो कार्रवाई की जाएगी।