उनके पास लगभग 90 जोड़ा चप्पलें, एक हजार पानी की बोतलें, एक हजार ब्रेड के पैकेट, चार कंटेनर चाय, आठ सौ पैकेट बिस्कुट, कई दर्जन केले थे। ये सामान उन्होंने अपनी ईदी के पैसों से जमा किया थे। तड़के सुबह इन युवाओं ने हाइवे पर पहुंचकर करीब छह सौ प्रवासी मजदूरों की मदद की। किसी को अपने हाथों से चप्पल पहनाई। किसी को पानी की बोतल दी। किसी को चाय, ब्रेड, बिस्कुट व केला देकर खूब दुआएं लीं।
इन्होंने हर प्रवासी को ईद-उल-फित्र की मुबारकबाद पेश की। प्रवासी मजदूरों ने मुस्कुरा कर इन युवाओं का हौसला बढ़ाया। युवाओं ने सोशल डिस्टेंसिंग व लॉकडाउन के हर एक नियम का पूरी मुस्तैदी से पालन किया। अपना फर्ज निभाकर ये युवा सुबह करीब सात बजे घर पहुंचे और नहा धोकर शुकराने की नमाज अदा कर घर वालों से ईद मुबारक बोला।
इन युवाओं के टोली की अगुवाई जमुनहियाबाग के नूर मोहम्मद ने की। उन्होंने कहा कि प्रवासी मजदूरों के खराब हालात व मुंशी प्रेमचंद के हामिद पात्र से प्रेरित होकर ईद के दिन कुछ अलग करने की सूझी। दोस्तों से मशवरा किया। सभी ने साथ दिया। सभी दोस्तों ने पैसा इकट्ठा किया। सारा सामान खरीदा। मिलकर मजदूरों की मदद की। खूब दुआएं लीं। इन सभी युवाओं की उम्र 20 से 25 साल है।
प्लीज हेल्प ग्रुप ने भी की मदद
ईद के दिन शाम के समय प्लीज हेल्प ग्रुप के मनोव्वर अहमद, समीर अहमद, नोमान, आसिफ हुसैन, कलीम, समीर सिद्दीकी, गोलू, रमजान अली, मो. कलीम अशरफ, शेरु, आसिफ अंसारी आदि ने बिस्कुट, भूजा, पानी की बोतल, गुड़ मजदूरों में वितरित किया। मजदूरों की सेवा कर ईद मनाई।