अपने ही विभाग के एक सिपाही के कुकृत्य के कारण मासूम बिटिया की मौत ने जिले की पुलिस को अंदर तक हिलाकर रख दिया है। बिटिया के जाने से उसके परिवार पर क्या गुजर रही है, इस पीड़ा को विभाग के अफसर और कर्मी महसूस कर रहे हैं। टूटे परिवार का हौसला बनकर वे हर कदम पर उनके साथ खड़े होने का प्रयास कर रहे हैं।
बीते शनिवार को बेटियों की शिक्षा-सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने का एलान करने के बाद सोमवार को जिले के 4700 पुलिसकर्मियों ने अपने एक दिन का वेतन देकर परिवार की आर्थिक मदद का फैसला किया है। पिछले सप्ताह मंगलवार की रात को सिपाही अभिषेक यादव ने जिला अस्पताल से मासूम को अगवा कर दरिंदगी के बाद उसकी हत्या कर दी थी।
बिटिया की मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। उसकी मां अस्पताल में जिंदगी के सबसे कठिन दौर से गुजर रही है तो पिता टूटे मन से परिवार को संभालने की कोशिश में जुटे हैं। तीन मासूम बच्चियों के भविष्य की चिंता के साथ घर की जिम्मेदारी दादी के कंधों पर है।
परिवार की स्थिति को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने मदद का दायरा केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रखा है। बच्चियों की पढ़ाई, घर की जरूरतों और रोजमर्रा की परेशानियों को भी ध्यान में रखा जा रहा है। पुलिसकर्मी लगातार परिवार के संपर्क में हैं और जरूरत के अनुसार राशन, भोजन तथा अन्य आवश्यक सामान की व्यवस्था करा रहे हैं।
30 लाख रुपये जुटने का अनुमान
परिवार की मदद में आर्थिक बाधा उत्पन्न न हो इसके लिए एसएसपी डॉ. कौस्तुभ से लेकर सिपाही तक करीब 4700 पुलिसकर्मियों ने एक दिन का वेतन देने का निर्णय लिया है। अनुमान है कि इससे लगभग 30 लाख रुपये जुटेंगे।
एसएसपी का कहना है कि इस घटना से सबसे अधिक असर बच्चियों के मन और उनके भविष्य पर पड़ेगा। इसलिए कोशिश है कि उन्हें बेहतर माहौल और शिक्षा मिलती रहे। पुलिस विभाग की यह पहल संदेश देने का प्रयास है कि कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने वाली वर्दी के पीछे संवेदनशील इंसान भी हैं जो संकट की घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं।
स्कूल में एडमिशन की प्रक्रिया शुरू
इस परिवार की सबसे बड़ी चिंता तीन छोटी बच्चियों का भविष्य है। पुलिस ने बच्चियों की शिक्षा को प्राथमिकता दी है। दादी के साथ रहने वाली तीसरी बेटी का दाखिला कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में करा दिया गया है। अन्य दो छोटी बहनों को निजी विद्यालय में दाखिला दिलाने की तैयारी है।