ईश्वर की कृपा ही है कि जान बच गई। पोखरा के लिए निकला था कि रास्ते में भूकंप आ गया। पता चला कि आने के तीन घंटे पहले जाजरकोट स्थित जिस होटल को छोड़ा था, वह जमींदाेज हो गया। हादसे में कई लोगों के मारे जाने की सूचना मिल रही है। पोखरा के रास्ते भर यही सोचता रहा कि ईश्वर की कृपा रही कि मैं समय रहते उस होटल से निकल गया।
यह कहना है शहर के व्यापारी अंकित जायसवाल का, जो शुक्रवार को नेपाल के जाजरकोट में हुकुम स्टे में ठहरे थे। उनका कहना है कि यह भगवान की कृपा रही कि उनके जीवन की रफ्तार, मौत से साढ़े तीन घंटे तेज थी। अगर रात साढ़े आठ बजे करीब होटल नहीं छोड़ता और कमरे में ही रहता तो...यह सोचकर रूह कांप जा रही है।
अलीनगर के अंकित गोरखपुर से पर्यटकों को नेपाल घुमाने के लिए भेजते रहते हैं। इसलिए उनका अक्सर नेपाल आना-जाना लगा रहता है। अंकित बताते हैं- पांच दिन पहले ही नेपाल गया था। उन्हें काठमांडो पशुपति नाथ मंदिर पहुंचना था। रविवार की सुबह कुछ लोगों को महादेव का दर्शन करवाना था।
सोचा, रात में ही निकलकर पोखरा पहुंच जाऊंगा और फिर अगले दिन काठमांडो के लिए निकल जाएंगे। उन्होंने बताया-रात में करीब 70 किलोमीटर गाड़ी चली होगी कि ड्राइवर ने बताया कि चलती गाड़ी हिल रही है। कुछ देर आगे जाकर जाकर देखा तो वहां कई लोग खड़े थे और भूकंप बोलकर शोर मचा रहे थे।
गाड़ी सड़क किनार छोड़कर मैं खुद को सुरक्षित करते हुए एक किनारे पहुंचा। घरवालों ने फोन किया और बताया कि टीवी पर नेपाल में ही भूकंप का केंद्र है और बहुत नुकसान हुआ। रात करीब साढ़े 12 बजे जब भूकंप का शोर कम हुआ तो वहां से आगे बढ़ा और सुबह पांच बजे करीब पोखरा पहुंचा।
वीडियो कॉल से नेपाल में भाई का हाल जाना
जैमिनी गार्डेनिया में उद्यमी संजय अग्रवाल अपने परिवार के साथ रहते हैं। उनके भाई अजय अग्रवाल और पारिवारिक डॉ सुरेश कानोडिया नेपाल में ही अपना व्यापार करते हैं। नेपालगंज इलाके में नेपालगंज मेडिकल कॉलेज के निदेशक हैं।
रात में भूकंप आया और समाचार चैनलों पर खबरें चलने लगीं तो उन्होंने यहां पूरे परिवार को सुरक्षित करते हुए तत्काल अपने भाई को वीडियो कॉल किया। वहां के हालात के बारे में जानकारी ली। संजय ने बताया कि चैनल पर जैसे-जैसे खबरें चलती रहीं, वैसे ही मन अशांत होने लगा। सबकुछ अच्छा रहे, इसके लिए ईश्वर से प्रार्थना करते रहे।