उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर की दूसरी सबसे पुरानी कालीबाड़ी की बंगाली दुर्गा प्रतिमा इस बार पंडाल में न स्थापित होकर कालीबाड़ी मंदिर के भीतर स्थापित की जाएगी। कोरोना संक्रमण को देखते हुए दुर्गा पूजा समिति कालीबाड़ी ने शासन की गाइडलाइन के पूर्व ही कोरोना से बचाव के लिए यह निर्णय लिया है।
मंदिर में प्रतिमा आसानी से रखी जा सके इसके लिए प्रतिमा की उंचाई 12 फुट से घटाकर चार फुट कर दी गई है। बंगाल से इस बार कलाकार नहीं आने के कारण स्थानीय मूर्तिकार कालीबाड़ी की दुर्गा प्रतिमा बना रहे हैं।
श्री श्री दुर्गा पूजा समिति, कालीबाड़ी, रेती चौक इस वर्ष अपना स्वर्ण जयंती वर्ष मना रही है। समिति ने 50वें वर्ष को और भी भव्य तरीके से मनाने की तैयारी की थी लेकिन कोरोना ने इन तैयारियों पर ग्रहण लगा दिया। जिसके बाद समिति ने कोरोना से बचाव के लिए कालीबाड़ी मंदिर में चार फुट की छोटी प्रतिमा स्थापित कर पूजन करने का निर्णय लिया।
पूजा पद्धति में किसी भी प्रकार का कोई बदलाव नहीं किया गया है। पूजा पहले की तरह ही बंगाली रीति-रिवाज से होगी। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए एक बार में 10 लोगों को ही अंदर आने की इजाजत होगी। मास्क, सैनिटाइजर और थर्मल स्क्रिनिंग के बाद ही श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा।
हर साल बंगाल से ढाक (ढोल) वालों को बुलाया जाता था लेकिन इस बार उन्हें नहीं बुलाया गया है। पूजन का सारा सामान बनारस से आएगा। विसर्जन 26 तारीख को बांग्ला विधि से किया जाएगा। शोभा यात्रा की इस बार कोई व्यवस्था नहीं है। प्रशासन की जो गाइडलाइन होगी उसका पालन करते हुए मूर्ति का विसर्जन किया जाएगा।