दुकानों पर मिठाई बनाने के लिए बड़ी मात्रा में पाउडर वाले दूध की सप्लाई की जा रही है। किराना दुकान भी इसे खरीद रहे हैं, क्योंकि आम लोग भी इसकी मांग कर रहे हैं। खजनी के पशुपालक गिरिजेश यादव ने बताया कि आजकल लोगों ने गाय-भैंस को पालना कम कर दिया है, लेकिन दूध की मांग बढ़ती जा रही है। पहले करीब हर घर में गाय या भैंस हुआ करती थी। अब लोग इसे नहीं पाल रहे।
होली नजदीक आते ही शहर में पाउडर वाले दूध की मांग बढ़ गई है। इसकी सबसे ज्यादा खपत मिठाई की दुकानों पर हो रही है। व्यापारियों के अनुसार, कुछ दिन पहले तक रोजाना 80 टन पाउडर का दूध खप रहा था, जो बढ़कर 125 टन तक हो गया है।
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हालांकि पहले केवल मिठाई के दुकानदार ही इसे खरीदते थे, लेकिन अब आम लोग भी खोआ और पनीर के लिए इसे खरीद रहे हैं। गोरखपुर में रोजाना नौ लाख लीटर दूध की खपत है, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में यहां दूध का उत्पादन ही नहीं है। पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में करीब 4.86 लाख गाय-भैंस हैं।
इसमें 60 प्रतिशत ही दूध देने वाले हैं। इनसे करीब ढाई लाख लीटर दूध का ही उत्पादन रोजाना होता है। ऐसे में बाकी मांग को पाउडर और पैकेट के दूध से पूरा किया जाता है। होली को लेकर इन दिनों दूध और खोआ की मांग बढ़ी हुई है।
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दुकानों पर मिठाई बनाने के लिए बड़ी मात्रा में पाउडर वाले दूध की सप्लाई की जा रही है। किराना दुकान भी इसे खरीद रहे हैं, क्योंकि आम लोग भी इसकी मांग कर रहे हैं। खजनी के पशुपालक गिरिजेश यादव ने बताया कि आजकल लोगों ने गाय-भैंस को पालना कम कर दिया है, लेकिन दूध की मांग बढ़ती जा रही है।
बेतियाहाता पूर्वी के पास सड़क पर ही दूध का लगता मंडी
- फोटो : अमर उजाला
पहले करीब हर घर में गाय या भैंस हुआ करती थी। अब लोग इसे नहीं पाल रहे। इसी की देन है कि पाउडर वाले दूध का कारोबार दिन प्रति-दिन बढ़ता जा रहा है। पशुपालक हरेराम यादव ने बताया कि उनके यहां रोजाना एक क्विंटल दूध का उत्पादन होता है, लेकिन इससे भी मांग पूरी नहीं हो पाती। त्योहार के समय तो दूसरे डेयरी से दूध लेकर सप्लाई करनी पड़ती है।
रोजाना 35 लाख रुपये का कारोबार
शहर में पाउडर वाले दूध का कारोबार तेजी से बढ़ता जा रहा है। पहले रोजाना 80 टन की खपत थी, लेकिन अब 125 टन हो गई है। होली में इसका कारोबार रोजाना 35 लाख तक पहुंच गया है। उनका कहना है कि सबसे ज्यादा ऑर्डर मिठाई की दुकानों से आ रहे हैं।
बाजार में 250 से लेकर 320 रुपये किलो तक के मिल्क पाउडर हैं। अलग-अलग मिठाइयों के लिए अलग पैकेट का इस्तेमाल होता है। बाजार में बनी अधिकांश मिठाइयों में मिल्क पाउडर का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। दूध कारोबारी संजय ने बताया कि त्योहार आते ही मिल्क पाउडर की मांग बढ़ गई है।
पहले केवल दुकानदार ही लेकर जा रहे थे। अब किराना वाले भी इसे लेकर जा रहे हैं। उनका कहना है कि आम लोग इसे खोआ, पनीर आदि बनाने में इस्तेमाल कर रहे हैं।
प्रोटीन और मिनिरल्स की कमी होती है पाउडर वाले दूध में
पशु विशेषज्ञ डॉ. राजेश पांडेय ने बताया कि दूध को एक विशेष प्रक्रिया से सुखाने के बाद उसका पाउडर बनाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में दूध में प्रोटीन और मिनिरल्स की कमी हो जाती है। अगर पैकेजिंग करने वाली कंपनी ने मानकों का कड़ाई से पालन नहीं किया तो पाउडर को सुरक्षित करने के लिए होने वाले केमिकल के प्रयोग से इस दूध से एलर्जी का खतरा भी बढ़ जाता है। इस दूध की वजह से अपच और पेट संबंधी दिक्कत भी हो सकती है।