पूर्वांचल में दवा की सबसे बड़ी मंडी भालोटिया मार्केट को नकली और नशीली दवाओं के धंधेबाजों ने बदनाम कर दिया है। पटना के बाद अब महराजगंज में करीब दो हजार एम्पुल (इंजेक्शन) पकड़े गए हैं, जिसके तार भी भालोटिया से जुड़ रहे हैं। हैरत की बात तो यह है कि गोरखपुर के ड्रग इंस्पेक्टर ही इससे अनजान हैं, जबकि बाहर से मिले इनपुट के आधार पर पिछले महीने नारकोटिक्स ब्यूरो की टीम भी यहां से जांच कर जा चुकी है।
भालोटिया मार्केट में हर ब्रांड की दवाएं थोक भाव में मिलती हैं। यहां से गोरखपुर-बस्ती और आजमगढ़ मंडल के अलावा बिहार और पश्चिम बंगाल के साथ ही पड़ोसी देश नेपाल तक दवाओं की आपूर्ति होती है। अनुमानत: हर दिन करीब 25 से 30 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। इस मार्केट की साख का फायदा उठाकर नशीली दवाओं के धंधेबाज भी सक्रिय हो गए हैं।
पिछले महीने पटना में पकड़ी गई प्रतिबंधित दवा का बैच नंबर गोरखपुर की दुकानों को आवंटित था। इसके आधार पर नारकोटिक्स टीम ने यहां आकर जांच की थी। अब महराजगंज में अलग-अलग ब्रांड के करीब दो हजार इंजेक्शन पकड़े गए हैं।
इसमें दर्द निवारक के अलावा नशीले इंजेक्शन हैं। चर्चा है कि धंधेबाज ये इंजेक्शन भी भालोटिया से ही लेकर नेपाल जा रहे थे।
डेढ़ दशक से चल रहा है धंधा
14 वर्ष पहले लखनऊ और गोरखपुर में एक ब्रांडेड कंपनी की नकली इंजेक्शन की बड़ी खेप पकड़ी गई थी। उसकी शिकायत एक अफसर ने ही की थी। पुराने व्यापारियों ने बताया कि उस वक्त लखनऊ में तैनात एक वरिष्ठ अफसर की पत्नी गर्भवती थीं, जिन्हें डॉक्टर ने सुरक्षित प्रसव के लिए एक महंगा इंजेक्शन लगवाने का सुझाव दिया था।
गोरखपुर से भेजे गए ढाई हजार रुपये के इंजेक्शन का तीन डोज महिला को लगाया गया, इसके बाद भी गर्भपात हो गया। अफसर और डॉक्टर ने इंजेक्शन बनाने वाली कंपनी से संपर्क किया तो पता लगा कि जिस इंजेक्शन की बात हो रही है, उसका उत्पादन कंपनी दो साल पहले ही बंद कर चुकी है। इसके बाद इस मामले में अवैध बिक्री व भंडारण के आरोप में लखनऊ और गोरखपुर से पांच लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी।
तीन साल पहले आपसी विवाद में खुला था पोल
भालोटिया मार्केट से जुड़े सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2021 में एक दवा व्यापारी ने दूसरे प्रांत से नकली दवाओं की खेप मंगाई थी। इस दवा को बिना बिल बाउचर के दूसरे दुकानदारों को बेच दिया गया, लेकिन किसी बात को लेकर उनमें विवाद हो गया, जिसमें 18 लाख रुपये फंस गए। मामला मीडिया तक पहुंचा तो प्रकरण की जांच शुरू हुई।
दो साल पहले भी मिला था इनपुट
दाे साल पहले नोएडा में नकली दवा बनाने की कंपनी पकड़ी गई थी। पूछताछ में पता चला कि नकली दवाएं गोरखपुर और वाराणसी के रास्ते बिहार, पश्चिम बंगाल व अन्य राज्यों तक पहुंचती हैं। पकड़े गए लोगों ने बताया था कि नकली दवाओं के धंधे में दो नेटवर्क काम करता है।
एक, दवाओं की बड़ी खेप को हिमाचल और पंजाब में चल रही कंपनियों से गोरखपुर की मंडी तक लाता है, इसके बाद दूसरा नेटवर्क इसे छोटे-छोटे बाजार तक पहुंचाता है। इस पर भी खाद्य औषधि प्रशासन ने सक्रियता नहीं दिखाई।
जिम्मेदार अफसरों को कुछ जानकारी नहीं
नकली और नशीली दवाओं के इस धंधे की जिम्मेदारों ने सुधि नहीं ली। या यह कहें कि जानबूझकर आंखें मूंद ली गईं। इसका असर यह है कि हर महीने ढाई से तीन करोड़ रुपये की नशीली दवाएं गोरखपुर से नेपाल, बिहार और पश्चिम बंगाल भेजी जा रही हैं।
हालांकि, इसकी जांच अभी बाकी है। ड्रग इंस्पेक्टर जय सिंह का कहना है कि उन्हें इसके बारे में जानकारी ही नहीं है। बता दें कि पिछले महीने जब नारकोटिक्स ब्यूरो की टीम ने पटना में मिली दवाओं के बाद भालोटिया मार्केट में जांच की थी, तब भी ड्रग इंस्पेक्टर को इस विषय में कोई जानकारी नहीं थी।
डीएलए एजाज अहमद ने बताया कि महराजगंज में नशीला इंजेक्शन पकड़े जाने की जानकारी हुई है। चुनावी व्यस्तता के चलते पिछले महीने जांच कम हुई थी। अब टीम बनाकर इसकी जांच कराई जाएगी। महराजगंज से भी इनपुट मंगाया जाएगा।