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मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति के निधन पर गोरखपुर के डॉक्टर जताया शोक, बोले- दो घंटे की मुलाकात में केवल भारतीयों की बात करते रहे

Sun, 06 Jun 2021 10:39 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

डॉ ऋतेश ने मॉरीशस के राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री रहे अनिरुद्ध जगन्नाथ से 2010 में की थी मुलाकात। निधन के बाद डॉ ऋतेश ने उनसे मिलने की सुनाई आपबीती।
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डॉ ऋतेश कुमार ने 2010 में मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति अनिरुद्ध जगन्नाथ से मुलाकात की थी। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति और छह बार के प्रधानमंत्री रहे अनिरुद्ध जगन्नाथ के निधन पर गोरखपुर शहर के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ ऋतेश कुमार ने शोक व्यक्त किया है। डॉ ऋतेश कुमार ने 2010 में अनिरुद्ध जगन्नाथ से मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुइस में राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की थी। दो घंटे के मुलाकात में वह केवल भारत की ही बातें करते रहे।
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डॉ ऋतेश बताते हैं कि 2010 में आर्थोपेडिक्स का पोर्ट लुइस में कॉन्फ्रेंस था। उस दौरान मुझे भी जाने का मौका मिला। पोर्ट लुइस में प्रधानमंत्री से मुलाकात करने का समय मांगा गया। उन्होंने भारतीयों का नाम सुनकर तत्काल मिलने का समय दिया। इसके बाद वह राष्ट्रपति भवन में करीब दो घंटे तक मुलाकात किए। उन्होंने बताया कि किस तरह मॉरीशस में भारतीय आए। उनकी याद में पोर्ट लुइस में प्रवासी घाट भी बना है। 

घाट के इतिहास के बारें में उन्होंने बताया कि भारत से करीब 300 वर्ष पूर्व इसी घाट पर प्रवासी आए थे। उस घाट पर कुछ पुरानी फोटो भी लगी है। इतना ही नहीं भारतीय के पूर्वेजों के बारे में जानकारी के लिए वहां एक अलग विभाग भी बना है। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों के समय में भारतीयों को वहां गिरमिटिया मजदूर कहा जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं है। 
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पूर्वांचल और बिहार के काफी लोग मॉरीशस में हैं। यही वजह है कि वहां भोजपुरी गाना लोग सुनते हैं। उसे वहां दूसरी तरह की भोजपुरी में डब किया जाता है। बताया कि गीता प्रेस की हिंदी और अंग्रेजी दोनों किताबें उन्हें भेंट की तो वह भावुक हो गए थे। उनका भारतीयों से इतना लगाव था कि वह हर भारतीयों को पसंद किया करते थे। 

उन्होंने बताया था कि मॉरीशस में कई सालों से लोग छठ पूजा मनाते हैं। वहां एक शिव मंदिर भी उन्होंने देखने के लिए कहा था। बताते हैं कि शिव मंदिर के पास एक नदी बहती है। मॉरीशस के लोगों की मान्यता है कि वह नदी शिव जी के जटा से निकली है। डॉ ऋतेश बताते हैं कि इतने बड़े राजनेता होने के बाद भी वह बेहद मिलनसार और मृदुभाषी थे। उनका भारतीयों के प्रति काफी लगाव था।
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