परिजनों के साथ डॉ. प्रमोद नारायण श्रीवास्तव
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कोरोना काल में वैसे तो सारे फ्रंट लाइन वर्कर अपनी परवाह न करते हुए लोगों को सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आयुष चिकित्सक डॉ. प्रमोद नारायण श्रीवास्तव की बात ही अलग है। उन्होंने घर के सभी सदस्यों के कोरोना संक्रमित होने के बावजूद 250 से अधिक बाहरी लोगों तक अपनी सेवाएं देकर उन्हें कोरोना से उबरने में मदद की है। शहर के बेतियाहाता स्थित आवास विकास कॉलोनी के रहने वाले आयुष चिकित्सक डॉ. प्रमोद कुमार श्रीवास्तव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गगहा में कार्यरत हैं।
कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच 12 अप्रैल को रैपिड रिस्पांस टीम में उनकी तैनाती कर शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बेतियाहाता की जिम्मेंदारी सौंप दी गई। उनके साथ ही कुछ और स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती वहां की गई, लेकिन स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर उन्होंने ज्वाइन नहीं किया।
ऐसे में डॉ. प्रमोद ने अकेले ही वहां मोर्चा संभाला। वह कोविड मरीजों तक हर तरीके की मदद पहुंचा ही रहे थे कि 19 अप्रैल को उनका छोटा बेटा 23 वर्षीय मोहित नारायण कोरोना पॉजीटिव हो गया। इसके बाद बारी-बारी से कुछ दिनों के अंतर पर बड़ा बेटा तुषार और फिर पत्नी कविता श्रीवास्तव भी कोरोना से संक्रमित हो गई।
डॉ. प्रमोद को छोड़ परिवार के सभी सदस्यों के संक्रमित होने से डॉ. प्रमोद के सामने संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई। उन्हें घर और बाहर दोनों जगहों पर सामंजस्य स्थापित करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था।
ऐसे पहुंचाते थे मदद
परिवार के सदस्यों के लिए खाना बनाना और खिलाना, उन्हें समय पर दवाईयों के साथ अन्य जरुरी सामान उपलब्ध कराना। साथ ही बाहर की जिम्मेंदारी भी संभालने में उन्हें दिक्कतें आ रही थी। इस बीच उनका छोटा बेटा गंभीर हो गया, उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी।
इन परिस्थितियों में भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और दोनों जगहों सामंजस्य स्थापित करते हुए सारी जिम्मेंदारियों का बाखूबी निर्वहन किया। जिसका परिणाम यह रहा कि उनके घर के तीनों सदस्य अब कोरोना नेगेटिव हो चुके हैं। वहीं बाहर के 250 से अधिक लोगों तक उन्होंने मदद पहुंचाकर कोरोना से उबरने में सहायता की।
डॉ. प्रमोद ने बताया कि रैपिड रिस्पांस टीम में उनका काम लेवल वन के कोरोना संक्रमित जो घरों में आइसोलेट थे उन तक दवाईया पहुंचाना, उनका आक्सीजन लेवल जांचना साथ ही आवश्यकता पड़ने पर उन्हें अस्पताल भेजना था। बताया कि कोरेना की रिपोर्ट आने के पहले दिन वह मरीज से संपर्क साध उन्हें दवाईयां पहुंचाना, तीसरे दिन उनके ऑक्सीजन लेवल की जांच कराना और अगर ऑक्सीजन लेवल कम हो तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की व्यवस्था कराना उनके कार्यों में शामिल था।
योग ओर आयुर्वेद का भी लिया सहारा
डॉ. प्रमोद ने बताया कि वह दवाओं के साथ लोगों योग करने की भी सलाह देते थे। बताया कि जब उनके बेटे को सांस लेने में दिक्कत हुई तो उन्होंने पंतंजलि योग पीठ की ओर से चलाए जा रहे ऑनलाइन शिविर की मदद से परिवार के सभी सदस्यों को योगाभ्यास कराया जिससे उन्हें काफी फायदा पहुंचा। काढ़ा के साथ ही आयुर्वेदिक औषधियां भी कोरोना से बचाव मेंम काम आई।