डॉ. प्रदीप राव गोरखपुर विश्वविद्यालय के गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं। साल 1992 में स्नातकोत्तर में 66.1 प्रतिशत अंक हासिल किये थे। उन्होंने प्राचीन भारत में राज्य कर्मचारी विषय पर शोध किया है।
लंबी है साहित्यिक गतिविधियों की कड़ी
डॉ. प्रदीव राव की साहित्यिक गतिविधियों की श्रृंखला लंबी है। वह लंबे समय से अध्यापन के कार्य से जुड़े हैं। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ सहित कई महत्वपूर्ण साहित्यिक संस्थाओं के सदस्य भी हैं। महायोगी श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अधिशासी समिति के सदस्य हैं। दर्जनों राष्ट्रीय संगोष्ठियों में उनके शोध पत्र शामिल किये जा चुके हैं। वह लंबे समय से राष्ट्रीय संगोष्ठियों से जुड़े हैं। साप्ताहिक समाचार पत्र हिंदवी में उनके 21 लेख भी प्रकाशित हुए हैं।
डॉ राव की प्रकाशित पुस्तकें
- प्राचीन भारतीय मुद्राएं
- प्राचीन भारतीय लिपि
- क्षत्रिय राजवंश
- प्राचीन भारतीय धर्मदर्शन (संपादन)
- प्राचीन भारत के प्रमुख शासक
- गुप्तोत्तरयुगीन भारत का राजनीतिक इतिहास
- चंद्रशेखर आजाद
- महायोगी गुरु श्री गोरक्षनाथ
- श्री गोरखनाथ मंदिर एवं गोरखपुर का इतिहास
- युगद्रष्टा महंत दिग्विजयनाथ
- योगीराज बाबा गंभीरनाथ
- राष्ट्रसंत महंत अवैद्यनाथ
इन पुस्तकों का किया संपादन
पुराणान्तर्गत इतिहास, नाथपंथ और भक्ति आंदोलन, पुराण और इतिहास, राष्ट्रीयता के अनन्य साधक महंत अवेद्यनाथ तीन खंडों में, राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ स्मृति ग्रंथ, भारतीय राष्ट्रीय एवं संत परंपरा, श्री गोरक्षपीठ : योग और शिक्षा, मंथन।