पुलिस के अनुसार, उनकी जेब से सुसाइड नोट मिला था। परिवार का दावा है कि इसमें गरिमा सिंह पुत्री ध्रुव नारायण सिंह का नाम लिखा था। घटना के बाद परिजन ने गरिमा और उसके साथियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। परिजन के मुताबिक, गरिमा सिंह ने डॉ. परमात्मा के नाम पर 1.40 करोड़ रुपये का लोन कराया था।
आरोप है कि लोन की रकम हड़प ली गई। इसके बाद ईएमआई जमा करने को लेकर बैंक की ओर से दबाव बनाया जा रहा था। परिवार का कहना है कि लोन की किस्त डॉक्टर के वेतन से भी कई गुना अधिक थी। परिजन इसी आर्थिक दबाव को उनकी खुदकुशी से जोड़कर देख रहे हैं। पुलिस तहरीर और सुसाइड नोट समेत जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आरोपों की पड़ताल कर रही है।
पुलिस के अनुसार, गरिमा के खिलाफ छह अन्य प्रार्थनापत्र भी मिले हैं। एसएसपी ने इन सभी प्रार्थनापत्रों की जांच कर निस्तारण के निर्देश दिए हैं। पुलिस शिकायतों में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए दस्तावेज, बैंक खातों में हुए लेनदेन और अन्य साक्ष्य जुटा रही है। जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर गरिमा और उसके साथियों के खिलाफ अलग से एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
अन्य जिलों में भी गरिमा के खिलाफ तहरीर
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गरिमा सिंह ने गोरखपुर में ही ठगी का नेटवर्क नहीं बनाया था बल्कि अन्य जिलों में भी उसकी जालसाजी की घटना सामने आ रही है। इसी क्रम में कुशीनगर सहित अन्य जिलों में तहरीर पड़ने की बात कही जा रही है। उसकी जांच कराकर वहां की पुलिस कार्रवाई की तैयारी में है।