बीते वर्ष मार्च से सितंबर के बीच छह महीने के लिए गिफ्ट डीड को प्रदेश सरकार ने ट्रायल के रूप में लागू किया था। इसके काफी अच्छे परिणाम आए। स्टांप एवं पंजीयन विभाग की ओर से इसके लागू करने के संबंध में प्रस्ताव तैयार किया गया, जिस पर प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने मंजूरी देते हुए स्थायी कर दिया।
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इसका शासनादेश तीन अगस्त को जारी हुआ है। निबंधन कार्यालय के कर्मचारियों के अनुसार शासनादेश जारी होने के बाद से गिफ्ट डीड की तादाद बढ़ी है। सोमवार तक 900 से अधिक लोग डीड करा चुके थे।
अधिवक्ता ब्रह्म कुमार मल्ल ने कहा कि पूर्व में शासन की ओर से दान विलेख यानी गिफ्ट डीड के संबंध में प्रयोग के तौर पर व्यवस्था की गई थी। इसे अब लागू कर दिया गया है। इसके बारे में जानकारी लेने लोग पहुंच हैं।
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अधिवक्ता सत्येंद्र त्रिपाठी ने कहा कि इस डीड से पारिवारिक विवाद खत्म होंगे। लोग अपने जीवित रहे संपत्ति अपने रक्त संबंधों में दे सकेंगे। पांच हजार रुपये का स्टांप निर्धारित होने से किसी पर कोई बोझ नहीं पड़ेगा।
एडीएम वित्त एवं राजस्व विनीत कुमार सिंह ने कहा कि शासनादेश जारी होने के बाद से गिफ्ट डीड शुरू कर दी गई है। निबंधन कार्यालय में रोजाना रजिस्ट्री हो रही है।