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Gorakhpur News: गुणसूत्रों की बनावट से बीमारी की पहचान का डॉक्टरों को दिया प्रशिक्षण

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- छह प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों ने दो दिवसीय कार्यशाला में लिया हिस्सा
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- कैरियोटाइपिंग तकनीक और जेनेटिक विकारों की पहचान का दिया गया व्यावहारिक प्रशिक्षण


अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। किसी बीमारी की वजह शरीर के भीतर मौजूद गुणसूत्रों की असामान्यता भी हो सकती है। इसकी पहचान के लिए सिर्फ सामान्य जांच पर्याप्त नहीं होती, बल्कि गुणसूत्रों की संरचना और संख्या का बारीकी से अध्ययन करना पड़ता है। इसी तकनीक में विशेषज्ञता बढ़ाने के लिए एम्स गोरखपुर में दो दिवसीय उन्नत कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें देश के अलग-अलग चिकित्सा संस्थानों से आए चिकित्सकों और शोधकर्ताओं ने कैरियोटाइपिंग और साइटोजेनेटिक्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया।
एम्स के शरीर रचना विज्ञान विभाग की जेनेटिक्स प्रयोगशाला में आयोजित कार्यशाला का विषय ''''''''क्रोमोसोम से क्लिनिकल इनसाइट्स'''''''' रहा। इसमें एम्स देवघर, एम्स ऋषिकेश, वीएमएमसी दिल्ली, आरएमएलआईएमएस और केजीएमयू लखनऊ सहित अन्य संस्थानों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
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कार्यशाला में विशेषज्ञों ने गुणसूत्रों की पहचान, उनकी संरचना में होने वाले बदलाव और बीमारी की पहचान में साइटोजेनेटिक्स की भूमिका पर जानकारी दी। एम्स नई दिल्ली की डॉ. रीमा दादा और बीएचयू की डॉ. रोयाना सिंह ने भी व्याख्यान दिए। एम्स गोरखपुर के प्रो. विवेक मिश्रा और डॉ. चेतन साहनी ने प्रशिक्षण में योगदान दिया।
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कार्यक्रम का आयोजन कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता के मार्गदर्शन में हुआ। शनिवार को समापन पर प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र दिए गए। आयोजकों के अनुसार, इस पहल से जेनेटिक जांच और चिकित्सा अनुसंधान में विशेषज्ञता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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