गोरखपुर शहर के चिकित्सकों ने मोदी सरकार के बजट को स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में क्रांति लाने वाला बताया है। उनका कहना है कि अगर सरकार इसे पूरी तरह से लागू कर सकी तो आम आदमी को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ज्यादा रुपये खर्च नहीं करने होंगे। बीमारियों पर काबू होगा और नए रोगों से घबराने की जरूरत नहीं होगी। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों तक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ भी आसानी से पहुंच सकेगा।
भविष्य के लिए सुखद संकेत
आईएमए के अध्यक्ष डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि कोरोना महामारी को देखते हुए बजट में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान दिया गया है। यह भविष्य के लिए सुखद संकेत है। स्वास्थ्य सेवाओं पर पहले भी काम चल रहा था। लेकिन कोरोना महामारी ने इसमें बदलाव कर दिया। यह बदलाव सरकार के बजट में देखने को मिला है। आम आदमी तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचेगी तो लोग बीमारी से बच सकेंगे।
सुविधाएं बढ़ेंगी तो मिलेगा लाभ
आईएमए के सचिव डॉ. वीएन अग्रवाल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का बजट बढ़ाए जाने की मांग काफी दिनों से की जा रही थी। लेकिन इसपर अब तक ध्यान नहीं दिया जा रहा था। कोरोना महामारी ने एक सीख दी है। इसका नतीजा बजट में देखने को मिला है। नए लैब खुलेंगे, इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा तो सुविधाएं बढ़ेंगी। इससे आम आदमी को आसानी से स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।
सरकारी अस्पतालों में बढ़ेंगी स्वास्थ्य सेवाएं
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने कहा कि बजट में प्राइमरी से लेकर उच्च स्तर तक की स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान दिया गया है। यह भविष्य के लिए बेहतर है। इससे सरकारी अस्पताल में और भी सुविधाएं बढ़ेगी। इस बजट से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं में काफी लाभ मिलेगा। इलाज के लिए उन्हें निजी अस्पतालों में जाने की जरूरत नहीं होगी।
नई बीमारियों का चल सकेगा पता
आईएमए के मीडिया प्रभारी प्रो. डॉ. अमित मिश्रा ने कहा कि कोविड की वजह से पहली बार बजट में नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल, इंट्रीग्रेटेड हेल्थ इन्फो पोर्टल जैसी सुविधाओं को और भी बढ़ाने का फैसला किया गया है। यह आने वाले दिनों में नई क्रांति लाएगा। समय रहते नई बीमारियों का पता लग सकेगा। साथ ही उसके उपचार की भी व्यवस्था हो सकेगी। यह बजट स्वास्थ्य सेवाओं में नई क्रांति लाएगा।
कुपोषण से मुक्ति पर दिया गया है ध्यान
बजट में महिला स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह आधी आबादी के लिए सुखद है। पहले भी कई तरह की योजनाएं महिलाओं और किशोरियों के लिए चल रहीं हैं। लेकिन कोविड ने इसे और भी मजबूत कर दिया है। पहली बार न्यूट्रिशन पर फोकस है। इससे मां और बच्चे एनिमिक होने से बच सकेंगे। कुपोषण से मुक्ति मिलेगी। - डॉ. मोनिका मिश्रा, डेंटल सर्जन, अंश आर्थोपेडिक सेंटर
निजी अस्पतालों की ओर कम जाएंगे लोग
नारायण हॉस्पिटल के मेजर डॉ. अमित श्रीवास्तव ने कहा कि पहली बार बजट में बायो लैब बनाने की बात कही गई है। यह भविष्य के लिए बेहतर है। इससे समय-समय पर हमें नई बीमारियों का पता चल सकेगा। समय रहते इलाज भी मिल सकेंगे। सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं में विस्तार करके आम आदमी को संजीवनी दी है। सरकारी इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा तो लोग निजी अस्पतालों की तरफ कम जाएंगे।
देश को गति देने वाला है बजट
तारामंडल शाही ग्लोबल हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. शिवशंकर शाही ने कहा कि यह बजट देश के विकास को गति देने वाला है। स्वास्थ्य क्षेत्र पर खर्च 137 प्रतिशत बढ़ाना, मकान, कृषि, वरिष्ठ नागरिकों को जो सुविधा दी गई है यह हमारे देश को आत्मनिर्भर और विकसित भारत बनाने में मदद करेगा। सीमा शुल्क दरों में परिवर्तन करके घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने की कोशिश की गई है।
स्वास्थ्य सेवाओं में आएगा परिवर्तन
शाही ग्लोबल हॉस्पिटल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सीमा शाही ने कहा कि बजट देश की स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़े स्तर पर परिवर्तन लाएगा। बजट में महिलाओं को तरजीह देते हुए उनके न्यूट्रिशन पर ज्यादा ध्यान दिया गया है। यह तारीफ के योग्य कदम है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर महिलाएं और उनके बच्चे कुपोषण का शिकार नहीं होंगे। यह बजट बेहद शानदार है।