बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ अमरेश सिंह बताते हैं कि जब पहली लहर की शुरुआत हुई थी तो वायरस के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं थी। पहले सैंपल की जांच में पूरी टीम डरी हुई थी। पहला पॉजिटिव केस मिलने पर काफी डर भी था, लेकिन जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ता गया, वैसे-वैसे जिम्मेदारियां भी बढ़ गईं। पूरी टीम 20 लाख कोरोना सैंपल की जांच अब तक कर चुकी है।
दूसरी लहर के बाद ब्लैक फंगस के मामले बढ़े तो एक बार फिर चुनौतियां सामने आ र्गइं, लेकिन टीम ने हिम्मत नहीं हारी और फंगस की जांच का भी जिम्मा उठाया, जिसकी बदौलत 300 से अधिक मरीजों की पहचान की गई। इन सबके बीच एचआईवी, स्वाइन फ्लू, टीबी, एईएस, सहित नियमित जांच की जिम्मेदारी भी टीम पर रही, जिसे बखूबी निभाया गया। टीम में डॉ जयेश पांडेय, डॉ अंकुर चौधरी, विवेक गौड़, प्रतिमा त्रिपाठी, हिमांशु विष्ठ, ज्योति कुमार, उमेश, देवेंद्र, बृजपाल, चंडी, अंबरीश, अभिषेक, शैलेश, नवीन, सुधा आदि शामिल रहीं।
कोरोना की पहली लहर में जब सब कुछ बंद हो गया था। उस दौरान सबसे अधिक दिक्कतें गर्भवतियों को थीं। बच्चों के साथ खुद को संक्रमित होने से बचाना था। इन सबके बीच बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की टीम ने जान जोखिम में डालकर कोरोना संक्रमित गर्भवतियों का सुरक्षित प्रसव कराया। पहली लहर से लेकर अब तक 283 कोरोना संक्रमित गर्भवतियों का सुरक्षित प्रसव टीम करा चुकी है।
विभागाध्यक्ष डॉ. वाणी आदित्य ने बताया कि सुरक्षित प्रसव कराना सबसे बड़ी प्राथमिकता थी, जिसे पूरी टीम ने बेहद सावधानी पूर्वक किया। इसका असर यह हुआ कि प्रसव सुरक्षित हुए। हालांकि इन सबके बीच चार से पांच नवजात कोरोना संक्रमित भी हुए, लेकिन उन्हें ज्यादा खतरा नहीं हुआ। प्रसव कराने वाली टीम में डॉ सुधीर गुप्ता से लेकर डॉ अनीता सिंह अन्य जूनियर रेजीडेंट भी शामिल रहे।