लक्षण को समझने की जरूरत
डॉ. वीएन अग्रवाल ने बताया कि खर्राटे लेने वाला हर व्यक्ति बीमार नहीं होता। लेकिन, अगर यह बीमारी है तो समस्या कभी भी बढ़ सकती है। आराम के समय नींद आना ठीक है, लेकिन काम करते हुए दिन में भी नींद आ रही है तो ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। इस दौरान यह ध्यान दें कि वजन तो नहीं बढ़ रहा है। गर्दन की मोटाई ज्यादा है और बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 27 से अधिक है तो बीमारी की चपेट में आने की आशंका बढ़ जाती है।
स्लीप स्टडी टेस्ट से पता चलती है बीमारी
डॉ. वीएन अग्रवाल ने बताया कि पॉलीसोनोग्रॉफी या स्लीप स्टडी टेस्ट से बीमारी का पता किया जाता है। इसमें मरीज की नींद के बारे में पता किया जाता है। इसके लिए मरीज को एक दिन भर्ती किया जाता है। उपचार के लिए सीपैप तकनीक इस्तेमाल करते हैं, जिस पर खर्च ज्यादा आता है। इलाज के लिए मैटलर एडवांस पैलेटल लिफ्टिंग और टंग रिटेनिंग डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है। इसे सीने से लगाया जाता है तो नींद के बारे में पूरी जानकारी मिल जाती है। इसके अलावा ऑक्सीमेट्री के जरिए पल्स ऑक्सीमीटर से खून में ऑक्सीजन की माप से पता किया जाता है।
बीमारी के कारण
मोटापा में हाइपोवेंटिलेशन सिंड्रोम, अस्थमा, फेफड़े की समस्या या पल्मोनरी फाइब्रोसिस, अटैक के समय छाती की मांसपेशियों का मस्तिष्क से संपर्क टूटने पर वायुमार्ग में रुकावट। हार्ट अटैक-किडनी फेल होने पर तरल पदार्थ का गले में जमना।