रोशनी का महापर्व दीपावली सोमवर को धूमधाम से मनाया जाएगा। श्रद्धालु दीप जलाकर विधि-विधान से भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर प्रसन्न करेंगे। वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन चतुर्दशी तिथि शाम पांच बजकर चार मिनट तक, पश्चात अमावस्या तिथि है। इस दिन हस्त नक्षत्र दोपहर बाद तीन बजकर 18 मिनट तक पश्चात चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग है।
दीपावली का महात्म्य
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि इसी दिन मां लक्ष्मी समुद्र मंथन से उत्पन्न हुईं थीं। बताया कि इस त्योहार को मनाने के कई कारण हैं। भगवान राम इसी दिन 14 वर्ष का वनवास काटकर अपने राज्य अयोध्या में आए थे, इसलिए इस दिन दीप जलाकर प्रसन्नता व्यक्त की जाती है। इस दिन मां लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। दीपावली की रात्रि को महानिशा की संज्ञा दी गई है। रात्रिकाल में जागरण कर सभी लोग मां लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए तत्पर रहते हैं। लक्ष्मी पूजन के अतिरिक्त इस दिन व्यापारिक स्थलों की पूजा, तुला पूजन, बहीखाता, लेखनी, कुबेर पूजन, भगवान गणेश, महाकाली और महासरस्वती का भी पूजन होता है।