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Gorakhpur News: गोरखपुर में भाजपा-सपा में सीधा मुकाबला, बांसगांव में कड़ी टक्कर

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गोरखपुर। गोरखपुर और बांसगांव संसदीय सीट से मुख्य मुकाबला भाजपा और गठबंधन प्रत्याशी के बीच ही नजर आया। अधिकांश बूथों पर दोनों दलों के लोग मुखर और मतदान को लेकर सजग दिखे। मतदान के दिन जातीय समीकरण भी बनते-बिगड़ते नजर आया। राशन और राम मंदिर भाजपा के लिए बड़ा सहारा बना। गोरक्षपीठ का प्रभाव मतदाताओं पर सीधा देखने को मिला। हालांकि, दलित और निषाद मतदाताओं में सेंधमारी कर गठबंधन ने अपनी स्थिति मजबूत कर ली। उधर, बांसगांव में भाजपा और गठबंधन से कांग्रेस प्रत्याशी के बीच कड़ी टक्कर है। दोनों दलों को हर बूथ से वोट मिले हैं।
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गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र
गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र में भाजपा के उम्मीदवार रवि किशन शुक्ल और गठबंधन से सपा की प्रत्याशी काजल निषाद के बीच सीधी लड़ाई है। गोरखपुर सदर, गोरखपुर ग्रामीण और सहजनवां विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी रवि किशन शुक्ला को अच्छी बढ़त मिलती दिखी। वहीं, पिपराइच और कैंपियरगंज विधानसभा क्षेत्र में सपा प्रत्याशी काजल निषाद को निषाद और दलित मतों को भी साथ मिला है। लेकिन अन्य पिछड़ी जातियां भाजपा के साथ नजर आईं।
अंतिम चरण के मतदान तक भाजपा वोटरों को राम मंदिर के मुद्दे पर अपने साथ जोड़ने में सफल रही। शनिवार को हुए मतदान में बुजुर्ग मतदाताओं के लिए राम मंदिर निर्माण तो महिलाओं के लिए राशन अहम रहा। जातीय मुद्दे पर भी भाजपा को बढ़त दिखी। अनुसूचित वोटरों में बिखराव का लाभ भी भाजपा को मिला। 70 वर्षीय बिहारी निषाद का कहना था कि भाजपा ही केवल राम मंदिर की बात करती है, विपक्षी तो केवल दुष्प्रचार कर रहे हैं। मां के साथ वोट डालने गए महेंद्र सिंह का कहना था कि राम आस्था से जुड़े हैं और विपक्ष लगातार आस्था पर प्रहार करता है।
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भटहट चौराहे पर चाय की दुकान में बैठे विश्म्भर प्रसाद का कहना था कि महामारी के बाद जब खाने का संकट था, तब सरकार ने आगे बढ़कर हाथ थामा। अब हम उसे कैसे छोड़ दें। पीपीगंज रेलवे स्टेशन पर मिले कैलाश प्रसाद ने भी राशन को बड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि अगर यह महत्वपूर्ण नहीं होता तो विपक्ष चुनाव प्रचार के बीच में आकर 10 किलो राशन की घोषणा नहीं करता। अमवा बूथ पर दोपहर 12 बजे वोटरों की लंबी कतार लगी थी। तीन टोले में बंटे इस गांव में मुस्लिमों की आबादी अच्छी खासी है। दूसरे नंबर पर यादव और सैंथवार मतदाता हैं। सैंथवार व अन्य बिरादरी के वोटर जहां भाजपा खेमे में नजर आए, वहीं मुस्लिम और यादव वोटर सपा खेमे में नजर आए। वोट डालने पहुंचे अली अहमद अली ने कहा कि यहां तो हर बार ही सीधी टक्कर होती है। भटहट बूथ पर वोट डालने पहुंचे राजेंद्र प्रसाद का कहना था कि यह पहला चुनाव है जब बसपा प्रत्याशी अपनी मौजूदगी दर्ज नहीं करा पा रहा है। बसपा को केवल वही वोट मिले हैं, जो खांटी कार्यकर्ता हैं।

बांसगांव संसदीय सीट
बांसगांव लोकसभा क्षेत्र में भाजपा से सांसद कमलेश पासवान और इंडी गठबंधन के प्रत्याशी सदल प्रसाद के बीच कड़ी टक्कर है। इस सीट पर दो-तीन दिनों में बदलते सियासी समीकरण ने दोनों दलों के रणनीतिकारों को उलझा दिया है। महिलाओं और बुजुर्ग मतदाता जहां बहुतायत संख्या में भाजपा के साथ नजर आए तो युवा तुर्क गठबंधन के साथ खड़ा दिखा। जातीय समीकरण में भी दलित और निषाद मतदाताओं में गठबंधन की सेंधमारी ने भाजपा को नुकसान पहुंचाया है। माना जा रहा है जीत और हार का फासला बहुत कम मतों से होगा।
भाजपा के प्रत्याशी के प्रति लोगों में नाराजगी मतदान के समय तक देखने को मिली। इसके चलते भाजपा का कोर वोट बैंक ब्राह्मण बंटा नजर आया। कौड़ीराम में सर्वोदय किसान इंटर कॉलेज में वोट डालने आए अमित वर्मा का कहना था कि हमने तो सांसद को देखा ही नहीं। युवाओं को रोजगार चाहिए जो कि नहीं मिल रही है। चवरिया बुजुर्ग में बने बूथ से वोट डालकर निकले सोनू प्रसाद का कहना था कि बसपा ने हमें छला है। इसलिए हम असली दलित के साथ हैं। उन्होंने नाम लिए बगैर कांग्रेस के सदल की ओर इशारा कर दिया। इसके अलावा चिल्लूपार में मतों का बिखराव देखने को मिला। गोला गोपालपुर बूथ पर बसपा के एजेंट भी कांग्रेस की पैरवी करते नजर आए। वहीं, चौरीचौरा और रुद्रपुर में दलित के साथ निषाद मतदाता भी इंडी गठबंधन के साथ नजर आए।
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