गोरखपुर। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए शिक्षकों के पढ़ाने के तरीके का मूल्यांकन किया जाएगा। शिक्षकों को पढ़ाने के समय का वीडियाे बनाकर शिक्षा विभाग को भेजना होगा। विभाग मूल्यांकन के आधार पर बेहतर शिक्षण कार्य करने वाले शिक्षकों को पुरस्कृत करेगा।
मूल्यांकन के कार्य की जिम्मेदारी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) को सौंपी गई है। यह विद्यालयों में शिक्षकों के पढ़ाने के तरीके और विद्यार्थियों पर उनके प्रभाव का मूल्यांकन करेगा। इसके लिए जिले के सभी विद्यालयाें के शिक्षकों को शिक्षण कार्य का पांच मिनट का वीडियो बनाकर बीईओ को भेजना होगा। इसके बाद वीडियो को बीएसए ऑफिस से डायट को भेजा जाएगा।
डायट वीडियो के मूल्यांकन का कार्य पांच स्तर में करेगा, जिसमें समुचित प्रस्तावना, विद्यार्थियों से संवाद, टीचिंग लर्निंग मेटेरियल का समुचित उपयोग, पूरी कक्षा की सहभागिता और बच्चों के रिस्पॉन्स शामिल हैं।
डायट के प्राचार्य सभी वीडियो का मूल्यांकन कर उसे उत्कृष्ट, मध्यम और सामान्य श्रेणी में रखेंगे। उत्कृष्ट शिक्षण कार्य करने वाले शिक्षकों को पुरस्कृत भी किया जाएगा और दूसरे शिक्षकों को प्रेरित करने के लिए उनके वीडियो को दीक्षा एप पर भी अपलोड किया जाएगा। इसमें शिक्षकों के पढ़ाने की कमियों को सुधारा जाएगा। शिक्षकों को प्रशिक्षण देकर उनके पठन-पाठन के तरीकों को भी निखारा जाएगा।
विद्यालयों में प्रभावी शिक्षण के लिए शिक्षकों को प्रेरित किया जा रहा है। इसी कड़ी में पठन-पाठन को और अधिक बेहतर बनाने के उद्देश्य से वीडियो के माध्यम से शिक्षकों के मूल्यांकन की कवायद शुरू की गई है।
प्रत्येक प्राथमिक, कंपोजिट और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की कक्षावार, विषयवार और लर्निंग आउटकम आधारित वीडियो रिकार्ड कर भेजनी होगी। इससे शिक्षकों के पढ़ाने के तरीके और विद्यार्थियों पर उनके प्रभाव का मूल्यांकन किया जाएगा।
- अभिषेक कुमार पांडेय, प्राचार्य, डायट