पूर्वोत्तर रेलवे में तकनीक का इस्तेमाल करके दो करोड़ रुपये का डीजल बचाया गया है। इंजीनियरों ने 50 डीजल इजनों में आक्जलरी पावर यूनिट लगा दिया, जिससे ट्रेन अगर दस मिनट से ज्यादा समय खड़ी रही तो मेन इंजन अपने आप बंद हो जाएगा और आक्जलरी पावर यूनिट से बिजली की सप्लाई होती रहती है।
पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने नई तकनीक को साल भर 50 इंजनों में लगा दिया है। रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2020-21 में मार्च से ट्रेनों के इंजन में आक्जलरी पावर यूनिट लगाया गया। इससे नवंबर तक 2 लाख 93 हजार लीटर डीजल की बचत हुई।
इसकी राशि करीब दो करोड़ रुपये है। आक्जलरी पावर यूनिट इंजन में छोटे इंजन की तरह काम करता है, जो इंजन से लेकर कोच तक बिजली की सप्लाई बहाल रखता है।
कोच में बत्ती, पंखा चालू रहता है और यात्रियों को किसी तरह से दिक्कत नहीं होती है। यह पूरी तरह से ऑटोमेटिक है, यानी ट्रेन जब दस मिनट से ज्यादा खड़ी होगी तो स्वत: चलने लगेगा और जैसे ही ड्राइवर, इंजन को रेस करेगा आक्जलरी पावर यूनिट बंद हो जाएगा।
पूर्वोत्तर रेलवे मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर रेलवे में आक्जलरी पावर यूनिट का इस्तेमाल करके करीब दो करोड़ के डीजल की बचत हुई है। इस तकनीक का इस्तेमाल सभी डीजल इंजन में किया जा रहा है।