बदल रहे मौसम में बच्चे निमोनिया के साथ डायरिया का शिकार हो रहे हैं। इसकी वजह से बच्चों की बीमारी की गंभीरता बढ़ती जा रही है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज का बाल रोग का सामान्य और इमरजेंसी वार्ड पूरी तरह से फुल हो गया है। निमोनिया और डायरिया की चपेट में आए बच्चों की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टर पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) और वेंटीलेटर पर रखना पड़ रहा है। यह गंभीरता शून्य से तीन साल के बच्चों में ज्यादा देखने को मिल रही है।
बीआरडी मेडिकल कालेज बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि बदल रहा मौसम बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक है। इस मौसम में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। बीआरडी में हर दिन 30 से 40 बच्चे इमरजेंसी में इलाज के लिए आ रहे हैं। इनमें 15 से 20 बच्चों को निमोनिया और डायरिया की वजह से भर्ती करना पड़ रहा है।
बताया कि निमोनिया में जकड़न की वजह से बच्चे ठीक तरीके से दूध और खा नहीं पाते हैं। उस पर मां जबरदस्ती दूध या खाना खिलाने की कोशिश करती है। इस दौरान बच्चों को खांसी आती है तो दूध या खाना सरक कर फेफड़ों में चला जाता है। फेफड़ों पर जाने पर बच्चे की मुश्किल बढ़ जाती है। ऐसे बच्चों को पीआईसीयू या फिर नियो नेटल केयर यूनिट (एनआईसीयू) में भर्ती करना पड़ रहा है।
बताया कि निमोनिया के मरीज अधिक है। पांच से सात फीसदी बच्चों में ही निमोनिया के साथ डायरिया की समस्या है। लेकिन, कुल मरीजों की बात करें तो 50 फीसदी मरीज इस वक्त निमोनिया के आ रहे हैं। बताया कि निमोनिया फेफड़े में होने वाला संक्रमण है, जो वायरस, बैक्टीरिया और फंगस तीनों से होता है। पीड़ितों में शून्य से तीन साल के बच्चे ज्यादा हैं।
गाय और भैंस का दूध पीने वाले बच्चों को निमोनिया का खतरा ज्यादा
डॉ. भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि अगर बच्चा मां का दूध पी रहा है तो उसे निमोनिया का खतरा बेहद कम होता है। लेकिन, अगर मां का दूध नहीं पीता है तो उसे निमोनिया का खतरा ज्यादा होता है। ऐसे मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। क्योंकि, ओपीडी में आने वाली 40 फीसदी महिलाओं में यह देखने को मिल रहा है, उन्हें दूध न होने की समस्या है। इसकी वजह वह गाय या भैंस का दूध का पिला रही है। इसकी वजह से ऐसे बच्चों को निमोनिया तेजी से हो रहा है।
निमोनिया के लक्षण
बुखार, पसीना आना, ठंड लगना। सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ। कफ और खांसी के साथ पीला बलगम आना।
बचाव
फ्लू का टीका जरूर लगवाएं। नियमित टीकाकरण में निमोकॉकल वैक्सीन, पीसीवी 13, हीमोफिलिस इन्फलुएंजा वैक्सीन लगवाएं।