दरअसल, कहीं दूसरी जगह रहने या मकान बेचने की स्थिति में बिजली कनेक्शन की पीडी (स्थाई विच्छेदन) करवानी होती है। इसके लिए पहले उन्हें खंड कार्यालय जाकर अपनी आईडी ( खाता संख्या) पर उपभोग किए बिजली बिल का पूरा भुगतान ( शून्य) करना होता है।
इसी के बाद पीडी की प्रक्रिया की जाती है। इसके लिए खंड दफ्तर पर आवेदन शुल्क ( घरेलू कनेक्शन 300 रुपये, कॉमर्शियल कनेक्शन 500 रुपये) जमा करने पर खंड की तरफ से ओएम ( ऑफिस मेमोरेंडम) की एक प्रति उपभोक्ता और दूसरी क्षेत्र के अवर अभियंता को डाक से भेजी जाती है।
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डाक मिलने के बाद जेई, उपभोक्ता के परिसर पर टंगा मीटर उतारता है और पीली पर्ची देता है। इसी पर्ची और ओएम के साथ जेई, पीडी फार्म को भरकर खुद और लाइनमैन के हस्ताक्षर से पीडी का सत्यापन करता है। इसके बाद पीडी की फाइल पहले उपखंड के एसडीओ के पास जाती है, वहां सत्यापित होने के बाद अधिशासी अभियंता खंड के सर्वर से उपभोक्ता की आईडी (नाम-खाता संख्या) डिलीट कर दी जाती है। इसमें किसी एक जगह भी कागज फंस गया तो आईडी चलती रहेगी और बिल बनता जाएगा, इसे बंद करवाना जरूरी होता है, वरना इसी का फायदा उठाया जाता है।
निगम के सूत्रों की मानें तो यह सारा खेल उपभोक्ता से सुविधा शुल्क वसूलने के लिए होता है। पीडी लंबित और लाखों रुपये का बिजली बिल लेकर खंड दफ्तर आने वाले उपभोक्ताओं की समस्याएं भी निगम के जिम्मेदार ही सुलझाते हैं। एक सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता ने बताया कि आवेदकों के कागजों में ही निगम के जिम्मेदार जुगाड़ निकाल लेते हैं। जैसे, मोहित ने पीडी के लिए आवेदन किया और जेई आकर परिसर से मीटर उतारकर उन्हें पीली पर्ची थमा गया। पांच साल बाद अचानक उसी कनेक्शन पर पांच लाख रुपये का बिल आ गया।
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ऐसे में अभियंता, उपभोक्ता के परिसर से मीटर जिस वर्ष हटाया गया था, उसी समय से कनेक्शन को खत्म मानकर बिल में संशोधन कर देते हैं। बताया कि इस संशोधन को पूरी सेटिंग के साथ किया जाता है। इससे उपभोक्ता को लगता कि उनकी परेशानी खत्म हो गई और निगम के जिम्मेदारों को सुविधा शुल्क मिल जाता है अलग से।
अधीक्षण अभियंता शहरी यूसी वर्मा ने कहा कि विभागीय प्रक्रिया है कि उपभोक्ता के कनेक्शन को नियमानुसार निपटाया जाए। पीडी के लिए आवेदन करने पर जांच के बाद उसे आगे बढ़ाया जाता है। लापरवाही होने की वजह से ही पीडी के मामले लंबित रह जाते हैं। इसमें सुधार की जरूरत है। उच्चाधिकारियों से इस संबंध में चर्चा कर जरूरी दिशा निर्देश जारी करवाया जाएगा।