गोरखपुर जिले में कूड़ाघाट ही नहीं, शहर के कई और इलाकों में भी काठमांडो की तर्ज पर देसी कसीनो धड़ल्ले से चल रहे हैं। हाल्सीगंज, पैडलेगंज, अंधियारीबाग जैसे शहर के कई इलाके हैं, जहां इस धंधे के सरगनाओं ने अपने घर में ही जुआखाना खोल रखा है। यहां एक दिन में लाखों के दांव लगाए जाते हैं। अब पुलिस अफसरों का ये कहना कि उनको इन देसी कसीनो के बारे में जानकारी ही नहीं, थोड़ा अजीब लगता है। यह पुलिस के खुफिया विंग पर भी सवाल खड़े करता है।
सट्टेबाजी के धंधे में सक्रिय एक सूत्र के मुताबिक, शहर में देसी कसीनो का सबसे बड़ा अड्डा पैडलेगंज और कूड़ाघाट में है। इसके पहले कोतवाली इलाका इसके लिए बदनाम था। लेकिन अब यह अवैध धंधा शहर में कई इलाकों के साथ ही ग्रामीण इलाकों में भी फैल गया है।
खोराबार थाना क्षेत्र के डांगीपार में बड़े पैमाने पर यह धंधा चल रहा है। यहां पर दूर-दूर से सटोरी जुआ खेलने आते हैं। सूत्र बताते हैं कि इस अड्डे को इलाके के एक नेताजी चलाते हैं। यहां भी खेलने के लिए प्रति घंटे की दर से नाम ( कमीशन) देना होता है। इससे संरक्षक को रोजाना हजारों रुपये की कमाई हो जाती है।
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