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58 जानलेवा कट: गोरखपुर शहर से सहजनवां तक न सोचें ये लखनऊ हाईवे हैं... जरी धीरे चलें

Fri, 07 Apr 2023 01:33 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।

सार

गोरखपुर जिले के 27 थाना क्षेत्रों में साल 2022 में 1,282 सड़क हादसे हुए हैं। इनमें 530 लोगों की जानें गईं और 808 लोग घायल होकर अस्पताल पहुंच गए। इसी बीच दो दिसंबर 2022 को डीएम ने पीडब्ल्यूडी, यातायात, नगर निगम सहित सभी विभागों के साथ बैठक कर 12 ब्लैक स्पॉट चिह्नित कर दिए।
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NH 28 पर जगह-जगह बने हैं जानलेवा कट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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विकास की नई इबारतें लिख रहे गोरखपुर की सड़कें रफ्तार भरने वाली हैं, लेकिन सुरक्षा के इंतजाम न होने की वजह से अगर आप ने ऐसा किया तो हादसे का खतरा भी है। चलिए चलते हैं गोरखपुर शहर से गीडा की ओर। इस मुख्य मार्ग पर सड़क हादसों की खबरें तो आप रोज ही सुनते होंगे। आज आपको इसकी वजह बताते हैं।

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ट्रांसपोर्टनगर से आगे बढ़ते ही आपको डिवाइडर में एक कट मिलेगा, जिससे अचानक गाड़ी आनी ही है। यहां से बचकर आगे बढ़े तो फिर दो कट से आप को और बचना है। किसी तरह से जाम से जूझते हुए राजघाट पुल को पार करिए और फिर अगले नौसड़ चौराहे तक आपको डिवाइडर में तीन कट मिल जाएंगे, जिनमें से अक्सर ट्रैक्टर-ट्राॅली वाले फर्राटा आगे आ जाते हैं। यहां पर गलती हुई तो जान बच पाना मुश्किल है।

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अब नौसड़ से आगे जैसे ही बढ़ेंगे तो फिर तीन कट हादसे को दावत दे रहे हैं। खजनी मोड़ तक रफ्तार भरने का सोचिएगा भी मत। इसके आगे आबादी है और डिवाइडर में कट हैं। चकाचक सड़क देखकर रफ्तार पकड़ी तो फिर खतरों से दोस्ती होनी तय है। कुल मिलाकर अगर आप को शहर से गीडा तक आना है तो जीरो प्वाइंट तक ही डिवाइडर के 58 कटों पर खुद को बचाना है। यही वजह है कि आए दिन हादसों में लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।

हाइवे पर न तो संकेतक लगे हैं, और न ही कहीं पर ओवर स्पीड को रोकने की व्यवस्था है। अंधे मोड़ पर रफ्तार से गाड़ियां दौड़ रहीं हैं और अचानक आने वाले अवरोधों से बचने में हादसे हो जा रहे हैं। इसके साथ ही अगर कहीं सरकारी निर्माण हो रहा है तो उसकी गिट्टी-मिट्टी भी सड़कों पर ही है। सर्वाधिक हादसे वाले ट्रांसपोर्ट नगर से जीरो प्वाइंट कालेसर की बात करें तो यहां पर इतनी दूर में हर कदम पर कट हैं।

साल 2022 में हुए 1,282 सड़क हादसे

जानकारी के मुताबिक, जिले के 27 थाना क्षेत्रों में साल 2022 में 1,282 सड़क हादसे हुए हैं। इनमें 530 लोगों की जानें गईं और 808 लोग घायल होकर अस्पताल पहुंच गए। इसी बीच दो दिसंबर 2022 को डीएम ने पीडब्ल्यूडी, यातायात, नगर निगम सहित सभी विभागों के साथ बैठक कर 12 ब्लैक स्पॉट चिह्नित कर दिए।

तय हुआ कि इन स्थानों पर संकेतक लगाए जाएंगे और हर वह जुगत होगी, जिससे हादसों को रोका जा सकेगा, लेकिन सबक शायद ही किसी ने लिया है। यही वजह है कि हर रोज हादसे हो रहे हैं। लोगों की जानें जा रही हैं। लोग घायल होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। पुलिस नियमों के उल्लंघन का जुर्माना वसूल लेती है, लेकिन आज तक ऐसे इंतजाम नहीं किए जा सके, जिससे हादसों को रोका जा सके।

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इन ब्लैक स्पॉट पर इन वजहों से होते हैं हादसे
  • सर्वाधिक हादसे गीडा में दाना-पानी वाले ब्लैक स्पॉट पर होते हैं। हाइवे से तेज गति से भारी वाहन नीचे उतरते हैं। भारी वाहन उतरने की जगह पर ही सड़क पार करने का कट है। इसके कारण दुर्घटना होती है।
  • कालेसर ब्लैक स्पॉट पर गोरखपुर से लखनऊ की ओर जाने वाले वाहन एवं लखनऊ की तरफ से कुशीनगर एवं बिहार जाने वाले वाहन एक-दूसरे को क्रॉस कर आगे बढ़ पाते हैं, जिससे हादसे होते हैं।
  • बोक्टा ब्लैक स्पॉट एरिया छोटा बाजार का क्षेत्र है। जहां ग्रामीण क्षेत्र के लोग पैदल एवं साइकिल से आते हैं। सड़क पार करने में अक्सर हादसे हो जाते हैं।
  • कसरौल ब्लैक स्पॉट ग्रामीण क्षेत्र है, साइकिल से चलने वाले एवं सड़क पार करने वाले अक्सर हादसे के शिकार होते हैं।
  • भीटी रावत ब्लैक स्पॉट गोरखपुर शहर से लखनऊ जाने वाले वाहन एवं सोनौली की तरफ से आने वाले भारी वाहन दोनों एक ही साइड में लेफ्ट लेन में लखनऊ जाने के लिए मिलते हैं। दोनों तरफ से आने वाले वाहन गति अधिक होने के कारण हादसे का शिकार होते हैं।
  • नौसड़ ब्लैक स्पॉट काफी भीड़-भाड़ वाला क्षेत्र है। भारी वाहनों का आवागमन अत्यधिक रहता है, जिससे हादसे होते हैं।
  • कोनी ब्लैक स्पॉट हाइवे से वाहन को उतरने एवं चढ़ने के लिए किसी प्रकार का कोई अंडरपास या ओवरब्रिज नहीं है। इस कारण हाइवे पर चढ़ते उतरते समय वाहन तेज गति होने के कारण हादसे होते हैं।
  • महावनखोर ब्लैक स्पॉट पर हाइवे से सटा हुआ ग्रामीण क्षेत्र है। सड़क पार करने में दुर्घटना हो जाती है।
  • रामनगर कड़जहां ब्लैक स्पॉट कुशीनगर एवं बिहार की तरफ से आने वाले वाहन जब हाइवे से उतरते हैं तो पुलिस चौकी के कट के सामने गोरखपुर से देवरिया जाने वाले वाहन एक-दूसरे को क्रॉस करते हैं, जिससे हादसे होते हैं।
  • मोतीराम अड्डा ब्लैक स्पाट पर अक्सर ओवरस्पीड के कारण हादसे होते हैं।

पहले चिह्नित किए गए ब्लैक स्पॉट
पीपीगंज, जंगल धूसड़ से पिपराइच, चौरीचौरा भोपा बाजार, बेलो सिघावल, मरचहवा बाबा तिराहा, देवीपुर, रामपुर बुजुर्ग, चवरिया खुर्द, खजांची चौराहा, चौमुखी, भीटी रावत, कसीहार बगहीवीर मंदिर, मचरचही कुटी, रावतगंज, फुटहवा इनार, निबियहवा ढाला आदि।

 
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इनको दी गई थी ब्लैक स्पॉट खत्म करने की जिम्मेदारी

ट्रैफिक विभाग, आरटीओ, पीडब्ल्यूडी विभाग और एनएचएआई को मिलकर ब्लैक स्पॉट्स को खत्म करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। डीएम कृष्णा करूणेश के साथ एआरटीए की बैठक भी हुई थी। डीएम ने जिम्मेदारों को निर्देश देते हुए कहा था कि नौसड़, बोक्टा, दाना-पानी, भीटी रावत, कसरौल, कसिहार बगहागीर मंदिर, मरचाहे कुटी, रावतगंज, फुटहवा ईनार, निबिहवा ढाला और चौमुखी ब्लैक स्पॉट पर 10 दिनों के अंदर सुधारात्मक कार्रवाई करके रिपोर्ट सौंपें, लेकिन इस तय समय तक अभी तक कोई सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकी है और ना तो जिम्मेदार रिपोर्ट सौंप सके हैं। जिससे ब्लैक स्पॉट पर हादसे रुकें।


थानाक्षेत्र में हुए हादसे और मौतें

क्रम थानाक्षेत्र  हादसे  मौत घायल
1- बांसगांव 43 12 36
2- बड़हलगंज 47 21 34
3- बेलघाट 14 03 12
4 बेलीपार 40 22 30
5 कैंपियरगंज 62 44 31
6 कैंट 85 19 60
7 चौरीचौरा 87 32 45
8 चिलुआताल 73 25 52
9 गगहा 49 28 31
10 गीडा 93 54 54
11 गोला 39 13 18
12 गोरखनाथ 22 06 14
13 गुलरिहा 69 30 36
14 हरपुर बुदहट 08 00 09
15 झंगहा 43 19 22
16 खजनी 38 18 33
17 खोराबार 106 41 37
18 कोतवाली 14 03 10
19 पीपीगंज 42 22 26
20 पिपराइच 84 29 67
21 राजघाट 14 05 06
22 रामगढ़ताल 54 13 39
23 सहजनवां 56 33 33
24 शाहपुर 44 20 20
25 सिकरीगंज 26 10 20
26 तिवारीपुर 10 03 09
27 उरुवा बाजार 20 05 24
  कुल             1282 530 808

फैक्ट फाइल
  • 1,282- हादसे हुए साल 2022 में
  • 530- लोगों की जान गई एक साल में
  • 106- हादसे खोराबार में हुए, जो सबसे अधिक हैं
  • 08- हादसे हरपुर बुदहट में हुए, जो सबसे कम हैं
  • 44- लोगों की मौत कैंपियरगंज में हुई, जो सबसे अधिक है
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