गोरखपुर। दो बार तल्लीझाड़ सफाई (तलहटी तक सफाई) कराने के नगर निगम के दावों की हकीकत अब बारिश के दौरान सामने आने लगी है। चार हजार से अधिक सफाईकर्मी लगाकर भी नगर निगम बारिश से पहले नाला साफ नहीं करवा पाया। बारिश हुई तो तलहटी में छिपा कचरा बाहर आने लगा। कई प्रमुख नालों से दोबारा भारी मात्रा में प्लास्टिक, पॉलीथिन और अन्य ठोस कचरा निकल रहा है। इससे पहले कराई गई सफाई की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
बृहस्पतिवार को भी नगर निगम की टीमों ने विभिन्न क्षेत्रों में नालों की सफाई कराई। सफाई के दौरान नालों से बड़ी मात्रा में प्लास्टिक और कचरा निकला, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि कई स्थानों पर पहले की गई सफाई प्रभावी नहीं रही। असुरन चौक पर बृहस्पतिवार सुबह से दोपहर तक हुए नाला सफाई में सड़कों पर काफी मात्रा में प्लास्टिक और अन्य कचरा निकाला गया। इसके साथ ही अन्य जगहों पर भी पोकलेन से सफाई की गई। लगातार बारिश के कारण नालों में रुकावट बनने से जलनिकासी भी प्रभावित हो रही है। नगर निगम में वर्तमान में 616 स्थायी और करीब 3,700 आउटसोर्सिंग सफाई कर्मचारी तैनात हैं। इसके बावजूद नालों की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि बारिश के दौरान बहकर आने वाला प्लास्टिक भी नालों को जाम करता है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्री-मानसून तल्लीझाड़ सफाई पूरी गंभीरता से कराई गई होती तो इतनी अधिक मात्रा में कचरा दोबारा नहीं निकलता।
अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार ने बताया कि नालों की सफाई का कार्य तेजी से चल रहा है। पहले भी कराया गया है, लोग प्लास्टिक नालों में डाल दे रहे हैं, इससे परेशानी हो रही है।