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गोरखपुर में गड़बड़झाला: मनरेगा में मुर्दे को मिला रोजगार, 52 दिन की मजदूरी का हुआ भुगतान

Fri, 23 Sep 2022 05:05 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

मनरेगा योजना में मनमानी का खेल हमेशा की तरह जारी है। कहीं पर बिना काम कराए भुगतान, तो कहीं पर मस्टररोल में इस्टीमेट का खेल बहुत पहले से चल रहा है। इतना ही नहीं फर्जी मजदूरों को भी भुगतान कर सरकार की मंशा पर पानी फेरने से जिम्मेदार बाज नहीं आ रहे हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सरकारी अभिलेखों में जिंदा व्यक्ति को मृत घोषित कर उसकी संपत्ति अपने नाम कराने का मामला अक्सर सुनने और अखबारों में पढ़ने को मिलता है, लेकिन बांसगांव ब्लॉक क्षेत्र का मामला तो कुछ अलग ही है। यहां तो मनरेगा योजना के तहत मुर्दे को भी रोजगार मिल रहा है जबकि जिंदा व्यक्ति बेरोजगार घूम रहा है।
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मनरेगा योजना में मनमानी का खेल हमेशा की तरह जारी है। कहीं पर बिना काम कराए भुगतान, तो कहीं पर मस्टररोल में इस्टीमेट का खेल बहुत पहले से चल रहा है। इतना ही नहीं फर्जी मजदूरों को भी भुगतान कर सरकार की मंशा पर पानी फेरने से जिम्मेदार बाज नहीं आ रहे हैं।

ताजा मामला ग्रामसभा फुलहर में प्रकाश में आया है। पखनपुर टोला निवासी भुल्लन की मृत्यु वर्ष 2020 में पेड़ से गिरकर हो गई थी। इनका मृत्यु प्रमाणपत्र भी ब्लॉक से जारी किया जा चुका है, लेकिन प्रधान, पंचायत सचिव और बीडीओ ने मिलकर उसकी पत्नी को प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत आवास दे दिया। उनके मृत पति भुल्लन के नाम पर वर्तमान प्रधान हरितोष पांडेय के कार्यकाल में प्रधान की भाभी रोजगार सेवक सिंधु पांडेय ने नवंबर 2021 से मार्च 2022 के बीच में भुल्लन के नाम मनरेगा योजना के तहत 52 दिन के काम मस्टररोल में भरा।
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मजदूरी के नाम पर 10,608 रुपये का यह भुगतान तत्कालीन बीडीओ बृजेश यादव व तत्कालीन सचिव लाल बहादुर ने मिलकर किया। इतना ही नहीं किसी भी जिम्मेदार ने अभी तक इस बारे में जानने की जहमत ही नहीं उठाई। तत्कालीन बीडीओ बृजेश यादव ने कहा कि गांवों में काम देखने व मजदूरों के मस्टररोल की डिमांड सेकेट्री द्वारा किया जाता और उन्हीं के द्वारा मस्टररोल भरकर पेमेंट के लिए भेजा जाता है। उसके बाद बीडीओ के डोगल से पेमेंट होता हैं। भुल्लन को आवास का आवंटन मरने से पहले किया गया था मरने के बाद कैसे मस्टररोल भरा गया यह नहीं पता।

तत्कालीन सचिव लालबहादुर ने कहा कि भुल्लन को आवास मिला था। मरे हुए का भुगतान नहीं होना चाहिए। इसके बारे में ब्लॉक के एकाउंटेंट बाबू से जानकारी लेकर बताएंगे। अब कौड़ीराम ब्लॉक में तैनात हूं। इस संबंध में तत्कालीन रोजगार सेवक सिंधु पांडेय से बात नहीं हो सकी। जब भी उनका पक्ष आएगा प्रकाशित किया जाएगा।

फुलहर के वर्तमान प्रधान हरितोष पांडेय ने बताया कि हमारे द्वारा भुल्लन को आवास योजना के तहत आवास दिया गया है। मृतक के नाम पर कैसे भुगतान हुआ है यह हमें नहीं पता।

सीडीओ संजय मीणा ने कहा कि मृत व्यक्ति को किसी भी काम का भुगतान नहीं किया जा सकता है। अगर भुगतान हुआ है तो गलत है। इसकी जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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