शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह का पार्थिव शरीर पहुंचा गांव।
- फोटो : अमर उजाला।
सियाचिन के ग्लेशियर में बलिदान हुए लार ब्लाक के बरडीहा दलपत निवासी शहीद रेजिमेंटल मेडिकल आफिसर कैप्टन अंशुमान सिंह का पार्थिव शरीर शुक्रवार शाम को उनके गांव पहुंच गया। इसकी सूचना मिलते ही हजारों की संख्या में लोग जुट गए हैं। भारत माता की जय के जयकारों से गांव गूंज रहा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
शुक्रवार शाम को भागलपुर सरयू नदी तट पर गार्ड ऑफ ऑनर के बाद पिता रविप्रताप सिंह ने बेटे को नम आंखों से मुखाग्नि दी। यह दृश्य देख सभी की आंखें नम हो गईं।
शाम को करीब साढ़े चार बजे अंशुमान का पार्थिव शरीर पहुंचा, जहां पर काफी संख्या में लोगों की भीड़ जुटी थी। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, राज्य मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम, जिलाधिकारी अखंड प्रताप सिंह, एसपी संकल्प शर्मा ने परिजनों को ढांढस बंधाया।
बंकर में लगी थी आग
गोरखपुर एयरपोर्ट पर शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह के पार्थिव शरीर को दिया गया सम्मान
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बता दें कि बरडीहा के रेजिमेंटल मेडिकल आफिसर कैप्टन अंशुमान सिंह (26) की तैनाती सियाचिन ग्लेशियर में थी। बुधवार की तड़के तीन बजे फाइबर ग्लास बंकर में आग लग गई। यह देख अंदर फंसे जवानों को अंशुमान बचाने लगे। उन्होंने तीन जवानों को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाल दिए। इसके बाद खुद शहीद हो गए।
इसकी सूचना मिलते ही गांव सहित इलाके के लोगों की भीड़ दरवाजे पर जुट गई। परिजनों के मुताबिक उनका पार्थिव शरीर सुबह दस बजे हवाई मार्ग से गोरखपुर एयरपोर्ट पहुंचना था। लेकिन अधिक बर्फबारी होने की वजह से वहां की उड़ाने रद्द हो गईं। जिसके बाद उनका पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार को पैतृक गांव नहीं आ सका। शुक्रवार को पार्थिव शरीर गोरखपुर से निकल चुका है।
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शहीद कैप्टन अंशुमान का पार्थिव शरीर पहुंचा गांव।
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अंदर फंसे जवानों को बचा खुद को नहीं बचा सके अंशुमान
शहीद कैप्टन अंशुमान का पार्थिव शरीर पहुंचा गांव।
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बुधवार की सुबह तड़के तीन बजे सियाचिन ग्लेशियर पर सेना के फाइबर ग्लास बंकर में आग लग गई। इसमें कई जवान अंदर ही फंस गए। उधर पल भर में आग ने विकराल रूप ले लिए। यह देख अंशुमान अपनी साहस का परिचय देते हुए जवानों को बाहर निकालने में जुट गए। उन्होंने कई जवानों को बाहर निकाल अस्पताल के लिए भेजवाए। इसी दौरान वह आग के चपेट में आ गए। जिसके बाद शहीद हो गए।